भारत का अंतरिक्ष सफर: ISRO का 100वां मिशन 29 जनवरी को होगा लॉन्च

श्रीहरिकोटा, 26 जनवरी 2025: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 29 जनवरी को अपना 100वां मिशन लॉन्च करेगा। यह मिशन आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित स्पेसपोर्ट से जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) के जरिए नेविगेशन सैटेलाइट NVS-02 को अंतरिक्ष में भेजने के साथ देश के अंतरिक्ष अभियानों में एक और मील का पत्थर साबित होगा।

इस ऐतिहासिक लॉन्च का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि यह ISRO के हाल ही में नियुक्त चेयरमैन वी. नारायणन का पहला मिशन है। GSLV अपनी 17वीं उड़ान में इस नेविगेशन सैटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। यह सैटेलाइट भारतीय उपमहाद्वीप में उपयोगकर्ताओं को सटीक पोजिशनिंग, वेलोसिटी और टाइमिंग सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

NavIC श्रृंखला का दूसरा सैटेलाइट:

यह सैटेलाइट भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली “नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन” (NavIC) के तहत दूसरा सैटेलाइट है। NavIC में कुल पांच सेकेंड-जेनरेशन सैटेलाइट शामिल हैं।

  • NVS-02 का वजन करीब 2,250 किलोग्राम है।
  • यह L1, L5 और S बैंड्स में नेविगेशन पेलोड से लैस है।
  • सैटेलाइट को डिजाइन और डिवेलप यू. आर. सैटेलाइट सेंटर ने किया है।

क्रायोजेनिक तकनीक का उपयोग:

GSLV में स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज का उपयोग किया गया है, जो इसे उन्नत और भरोसेमंद बनाता है। 29 जनवरी की सुबह 6:23 बजे निर्धारित इस लॉन्च के लिए 27.30 घंटे का काउंटडाउन मंगलवार सुबह 2:30 बजे से शुरू हो चुका है।

ISRO की हालिया उपलब्धियां:

ISRO ने हाल ही में स्पेस डॉकिंग क्षमता हासिल की है, जो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत को यह क्षमता रखने वाला चौथा देश बनाती है।

  • स्पेस डॉकिंग ISRO के SpaDeX मिशन के तहत सफलतापूर्वक प्रदर्शित की गई थी।
  • यह तकनीक भविष्य के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन और भारत के महत्वाकांक्षी स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर ISRO टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक नया अध्याय लिखेगी और हमारे महत्वाकांक्षी मिशनों की नींव को और मजबूत करेगी।”

गगनयान और भविष्य की योजनाएं:

ISRO ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।

  • ह्यूमन-रेटेड लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (HLVM3) की असेंबलिंग शुरू हो चुकी है।
  • पहले बिना क्रू वाले मिशन के तहत S200 सॉलिड रॉकेट मोटर के नोजल एंड सेगमेंट की स्टैकिंग पूरी हो चुकी है।
  • इसके अलावा, ISRO की योजना 2035 तक “भारत अंतरिक्ष स्टेशन” स्थापित करने की है।

ISRO के 100वें मिशन का महत्व:

यह मिशन भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रतीक है, जो न केवल स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देता है, बल्कि देश को एक अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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