देश को गृह युद्ध की ओर धकेलने की साजिश: मौलाना यासूब अब्बास का बयान

लखनऊ। संभल हिंसा और अजमेर दरगाह के सर्वे पर शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने गंभीर प्रतिक्रिया दी है। सोमवार को जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने देश में बढ़ती धार्मिक असहमति और विभाजनकारी प्रवृत्तियों पर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि हिंदुस्तान को एक बार फिर तबाही के रास्ते पर धकेलने की साजिश रची जा रही है।

संभल हिंसा पर तीखी प्रतिक्रिया

मौलाना ने संभल हिंसा को “खून की होली” बताते हुए कहा कि इस त्रासदी में कई परिवार उजड़ गए, महिलाओं के सुहाग छिन गए, और देश में नफरत का माहौल फैलाने का प्रयास किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी तरह देश को गृह युद्ध की ओर ले जाया जाएगा?

मंदिर-मस्जिद विवाद पर टिप्पणी

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि एक नई परंपरा शुरू हो गई है, जहां हर मस्जिद और मकान के नीचे मंदिर खोजने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अजमेर दरगाह का उदाहरण देते हुए कहा, “यह दरगाह 800 साल पुरानी है और यहां इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया जाता है। यहां मुसलमानों से ज्यादा हिंदू दर्शन करने आते हैं, फिर भी यहां मंदिर ढूंढने की बातें हो रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि बाबरी मस्जिद के बाद अब हर धार्मिक स्थल को विवाद का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है, जो देश की एकता और शांति को भंग करने की साजिश है।

आस्था का सवाल, धर्म नहीं

मौलाना ने स्पष्ट किया कि यह मामला धर्म का नहीं, बल्कि आस्था का है। उन्होंने कहा कि चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो या चर्च, हर धर्म के लोग अपनी शांति और सुकून के लिए इन स्थानों पर जाते हैं। “लोगों की आस्था को चोट पहुंचाने वाले प्रयास न केवल गलत हैं, बल्कि देश की अखंडता के लिए भी खतरनाक हैं,” उन्होंने कहा।

शांति और एकता के लिए अपील

मौलाना यासूब अब्बास ने देशवासियों से अपील की कि वे धर्म और समुदाय के नाम पर होने वाली विभाजनकारी राजनीति को पहचानें और इसके खिलाफ खड़े हों। उन्होंने कहा कि अगर देश के सभी नागरिक एकजुट हो गए, तो हिंदुस्तान फिर से “सोने की चिड़िया” बन सकता है।

देश की अखंडता पर जोर

अपने संदेश में मौलाना ने कहा, “हमारा देश विशाल है और यहां जमीन की कोई कमी नहीं है। मंदिर बनाना है तो कहीं और बनाएं, लेकिन मस्जिदों के नीचे मंदिर खोजने की कोशिश न करें। यह देश की शांति को खत्म करने की साजिश है, जिसे हम सफल नहीं होने देंगे।”

निष्कर्ष

मौलाना यासूब अब्बास के बयान ने देश में बढ़ते धार्मिक और सामाजिक विभाजन के प्रति एक मजबूत संदेश दिया है। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से शांति और एकता बनाए रखने का आग्रह किया है, ताकि भारत फिर से अपनी प्राचीन समृद्धि और एकता का प्रतीक बन सके।


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