‘बेटा! तुम्हारा चेहरा याद नहीं मगर…’ चार साल के बेटे के लिए अतुल सुभाष की मार्मिक चिट्ठी ने झकझोरा देश का दिल

बेंगलुरु: 34 वर्षीय AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या ने देश को झकझोर कर रख दिया है। मरने से पहले अतुल ने 90 मिनट का वीडियो और 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा। इनमें से एक पत्र उन्होंने अपने चार वर्षीय बेटे को लिखा, जिसे पढ़कर लोग भावुक हो रहे हैं।

चिट्ठी की शुरुआत:

अतुल ने लिखा, “बेटा! जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था, तो मैंने सोचा था कि मैं तुम्हारे लिए अपनी जान दे सकता हूं। लेकिन दुखद है कि अब तुम्हारी वजह से ही मैं अपनी जान दे रहा हूं। तुम्हारा चेहरा अब मुझे याद भी नहीं। मैं केवल तुम्हारी एक साल की उम्र की तस्वीरें देखता हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “तुम्हें ब्लैकमेल का साधन बना दिया गया है। तुम्हारी मां, नानी और मामा मुझे और मेरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर रहे हैं।”  अपने बेटे को संबोधित करते हुए अतुल ने कहा, “मैं अपने पिता के दुख का कारण नहीं बन सकता। तुम्हें शायद समझ नहीं आएगा कि पिता क्या होता है, लेकिन मैं जानता हूं कि पिता होना सबसे बड़ा गौरव है। काश, मैं तुम्हारे साथ होता।” अतुल ने अपने पत्र में समाज और न्यायिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “मैं सोचता था कि महिला सशक्तिकरण एक सकारात्मक पहल है, लेकिन यह पागलपन बन चुका है। यह वैल्यूज को खत्म कर रहा है।”

बेटे के लिए सपनों का जिक्र:

अतुल ने लिखा, “मैंने सोचा था कि जब तुम कॉलेज जाओगे, तो मैं तुम्हारे लिए कार खरीदूंगा। इसके लिए मैंने पैसे भी बचाने शुरू कर दिए थे। मगर अब ये सपने अधूरे रह जाएंगे।”

भावुक संदेश:

उन्होंने बेटे को लिखा, “तुम्हारे ऊपर किसी का कोई कर्ज नहीं है। समाज और सिस्टम पर भरोसा मत करना। अगर मेरा खून तुममें जिंदा है, तो जीना, प्यार करना, और पूरी ताकत से लड़ना। सुंदर चीजें बनाना और समस्याओं को अपने दिमाग से हल करना।”

देशभर में चर्चा का विषय:

इस चिट्ठी ने देशभर में दहेज कानून, पुरुषों के अधिकार, और न्यायिक व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। पुलिस ने अतुल की पत्नी और ससुरालवालों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।

न्याय की मांग:

अतुल के परिवार और उनके समर्थकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और पुरुषों के लिए भी कानूनी सुरक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। यह घटना समाज में चल रहे अन्याय और पीड़ा को सामने लाती है। अतुल की मार्मिक चिट्ठी ने लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है।


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