भारत और बांग्लादेश के संबंधों में एक नया तनाव उभर आया है। रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब कर बॉर्डर पर बीएसएफ (भारतीय सीमा सुरक्षा बल) द्वारा लगाए जा रहे बाड़ पर आपत्ति जताई। बांग्लादेश का कहना है कि यह कदम द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है। भारत का पक्ष है कि यह बाड़ सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बनाई जा रही है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किमी लंबी सीमा साझा होती है, जो ऐतिहासिक रूप से घुसपैठ, तस्करी और आपराधिक गतिविधियों का केंद्र रही है। भारत ने सीमावर्ती इलाकों में बाड़ लगाने का कार्य तेज किया है, जिसे बांग्लादेश सरकार ने “समझौतों का उल्लंघन” करार दिया है।
- बांग्लादेश का आरोप:
- सीमा पर बाड़ लगाने से सीमावर्ती गांवों की आजीविका और आवाजाही प्रभावित होगी।
- भारत के इस कदम को “आक्रामक नीति” के तौर पर देखा जा रहा है।
- भारत का पक्ष:
- सीमा पर बाड़ अवैध गतिविधियों, जैसे तस्करी और घुसपैठ रोकने के लिए आवश्यक है।
- बीएसएफ का कहना है कि यह कार्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हो रहा है।
राजनीतिक समीकरण और शेख हसीना का मुद्दा
इस विवाद के राजनीतिक आयाम भी गहराते जा रहे हैं।
- शेख हसीना और भारत:
- पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जो भारत की करीबी मानी जाती हैं, बांग्लादेश में सत्ता से बाहर होने के बाद से भारत में रह रही हैं।
- बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसके नेतृत्व में नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस हैं, भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रही है।
- बांग्लादेश में भारत-विरोधी माहौल:
- यूनुस सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत के खिलाफ बयानबाजी तेज हुई है।
- पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश के संबंधों में सुधार ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई खटास ला दी है।
क्या होगा आगे?
इस विवाद के कारण भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बढ़ता दिख रहा है।
- सीमा पर बढ़ती सतर्कता:
- भारत अपनी सीमा की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।
- बीएसएफ ने घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की योजना बनाई है।
- डिप्लोमेटिक वार्ता की जरूरत:
- विशेषज्ञ मानते हैं कि इस विवाद को शांत करने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता आवश्यक है।
- यदि यह विवाद बढ़ता है, तो यह दोनों देशों के व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।
भारत-बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक संबंध हमेशा जटिल रहे हैं। सीमा विवाद और शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में दरार ला सकता है।
“आप दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं”
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का यह कथन इस स्थिति में बिल्कुल सटीक बैठता है। सवाल यह है कि क्या भारत और बांग्लादेश इस विवाद को सुलझा पाएंगे या यह दोनों देशों के बीच एक नई कड़वाहट को जन्म देगा? आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कूटनीति इस विवाद को कैसे संभालती है।
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