राजस्थान में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद अब शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर तबादले हुए हैं। सोमवार रात शिक्षा विभाग ने 4,000 प्रधानाचार्यों की तबादला सूची जारी की, जिसमें सीकर जिले के 200 से ज्यादा प्रिंसिपल शामिल हैं।
सबसे ज्यादा असर पूर्व शिक्षा मंत्री और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के क्षेत्र की स्कूलों में देखा गया है। यहां करीब 80% प्रधानाचार्यों का तबादला बॉर्डर जिलों — बाड़मेर, सिरोही, जैसलमेर, नागौर, जालौर, बूंदी और बारां में कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, केवल उन्हीं प्रधानाचार्यों को तबादले से छूट मिली है जिनकी सेवा अवधि 2 साल से कम बची है या जो दूसरे जिलों के मूल निवासी हैं।
शिक्षक संगठनों के आरोप
शिक्षक संगठनों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि महिला और दिव्यांग कर्मचारियों के भी तबादले जानबूझकर दूरदराज के जिलों में किए गए हैं। दूसरी ओर, सीकर जिले के सैकड़ों स्कूल अब भी प्रिंसिपलों की कमी से जूझ रहे हैं।
बिना डिजायर के तबादले पर उठे सवाल
सीकर जिले में कई प्रिंसिपलों के तबादले ऐसे स्कूलों में हुए हैं जिनके नाम न तो विधायकों की “डिजायर सूची” में थे और न ही शिक्षक संघ राष्ट्रीय सहित अन्य संगठनों की सिफारिश में। वहीं, कुछ विधायकों के करीबी प्रिंसिपलों को जिले के ही दूसरे ब्लॉकों में भेजने पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
डोटासरा का भाजपा पर हमला
तबादला सूची सामने आने के बाद डोटासरा ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा— “सरकार एक तरफ तबादलों पर प्रतिबंध का नाटक करती है और दूसरी तरफ बीच सत्र में 4,000 प्रिंसिपलों का तबादला कर देती है। यह शेखावाटी में भाजपा की हार का बदला है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जातिगत आधार पर प्रिंसिपलों को निशाना बनाकर बॉर्डर जिलों में भेजा है। डोटासरा ने चेतावनी दी कि जनता आगामी चुनावों में भाजपा को इसका जवाब देगी।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







