जयपुर। राजस्थान में निकाय चुनावों को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने गुरुवार को भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर शहरी निकाय चुनावों को टाल रही है, जो संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।
गहलोत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “संविधान का अपमान करना भाजपा के डीएनए में है। जिस तरह से सरकार शहरी निकाय चुनावों की तारीखों की घोषणा में देरी कर रही है, वह लोकतंत्र का गला घोंटने के बराबर है।” उन्होंने कहा कि अब तो उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट कर दिया है कि चुनावों की तारीखें तुरंत घोषित की जाएं, लेकिन सरकार टालमटोल कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार संविधान, लोकतंत्र और न्यायपालिका—तीनों की अवहेलना करती रहेगी। उन्होंने मांग की कि सरकार अविलंब निकाय चुनावों की तारीखों की घोषणा करे, ताकि स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल हो सके।
हाईकोर्ट की सख्ती
राजस्थान हाईकोर्ट ने भी निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग की ढिलाई पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद निर्धारित समय सीमा में चुनाव नहीं कराए गए। जनवरी में नगर पालिकाओं का कार्यकाल पूरा हो चुका है और फिलहाल एसडीओ को प्रशासक नियुक्त किया गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यह व्यवस्था केवल छह माह तक ही मान्य हो सकती है। अगर समय पर चुनाव नहीं हुए तो स्थानीय स्तर पर शासन शून्यता पैदा हो जाएगी, जिससे शहरी विकास और जमीनी गतिविधियां प्रभावित होंगी।
कांग्रेस का दबाव बढ़ा
गहलोत के हमले के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार पर दबाव और तेज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि निकाय चुनावों की देरी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और भाजपा सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








