बिहार। बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी का स्तर दिन-ब-दिन और दिलचस्प होता जा रहा है। कभी भ्रष्टाचार, कभी अपराध, तो कभी विकास की बहस, लेकिन अब यह जंग एक बिल्कुल नए मोड़ पर पहुँच चुकी है – उम्र का घोटाला। राज्य में चर्चा है कि सबसे बड़ा “उम्र चोर” कौन है।
PK का हमला – सम्राट चौधरी उम्र चोर
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने हाल ही में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सम्राट चौधरी ने 1995 के एक हत्या मामले में मुकदमे से बचने के लिए अपनी उम्र के आंकड़ों में छेड़छाड़ की। किशोर के अनुसार, सम्राट ने दस्तावेजों में अलग-अलग जन्मतिथि दिखाई और खुद को नाबालिग साबित कर कोर्ट से ट्रायल से राहत पा ली। प्रशांत किशोर ने कहा, “जो नेता आज बिहार का चेहरा बनने का दावा कर रहे हैं, उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ही उम्र चुराकर की थी।”
बीजेपी का पलटवार – PK के पास बैठा असली उम्र चोर
पीके के आरोपों के अगले ही दिन भाजपा ने पलटवार किया। पार्टी के मीडिया प्रमुख दानिश इकबाल ने प्रशांत किशोर पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बगल में बैठा उदय सिंह ही असली उम्र चोर है। दानिश के अनुसार, उदय सिंह ने 2004 के लोकसभा चुनाव में 44 साल की उम्र बताई थी, लेकिन 2009 में चुनाव लड़ते समय 57 साल की हो गई। उन्होंने कहा कि पाँच साल में 13 साल कैसे बढ़ गए, यह सीधे तौर पर चुनावी धोखाधड़ी का मामला है।
चुनाव आयोग को भी घसीटा गया
बीजेपी ने यह भी कहा कि यदि किसी उम्मीदवार ने अपनी जन्मतिथि में गड़बड़ी की है तो यह सीधे चुनावी अपराध है और चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। दानिश इकबाल का तंज था – “इतना बड़ा उम्र घोटाला करने के बाद भी अगर कोई बच सकता है, तो यह लोकतंत्र के साथ मजाक है।”
जनता के बीच नया सियासी मसाला
बिहार की जनता, जो रोज़ाना जाति समीकरण, विकास वादों और गठबंधन की उठापटक सुनते-सुनते थक चुकी थी, अब इस नई जंग को लेकर खूब मजे ले रही है। सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है – “उम्र चोर ऑफ द ईयर” और “बिहार का एज फैक्टर” जैसे शीर्षक खूब वायरल हो रहे हैं।
मुद्दों से भटकाव या रणनीति?
राजनीतिक जानकार इसे जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की चाल बता रहे हैं। बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सवाल पीछे रह गए हैं और अब विमर्श इस पर केंद्रित है कि किस नेता ने जन्मतिथि बदलकर क्या फायदा उठाया।
“उम्र चोर” की बहस जारी रहेगी
बिहार की सियासत में अब अगला सवाल यही है कि सबसे बड़ा “उम्र चोर” कौन निकलेगा। क्या यह मामला केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा या सचमुच चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुँचेगा? फिलहाल इतना तय है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में उम्र का हिसाब उतना ही चर्चा में रहेगा जितना चुनावी वादों का।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







