दशहरे की रात दो ‘रावण’ हुए फरार! ओड़िशा जेल से निकली थ्रिलर फिल्म जैसी कहानी”

कटक, ओडिशा | अक्टूबर 4, 2025 — जब पूरा देश रावण दहन देख रहा था, तभी ओड़िशा की चौद्वार सर्कल हाई-सिक्योरिटी जेल में दो असली “रावण” अपनी ही रिहाई की पटकथा लिख रहे थे। रात के करीब 1:30 बजे, दशहरा सेलिब्रेशन के बीच, दो कैदियों — राजा साहनी और चंद्रकांत कुमार, दोनों बिहार निवासी — ने अपनी कोठरी की लोहे की सलाखें आरी से काटीं और कंबलों को रस्सी बना कर दीवार फांद दी।

दशहरा सेलिब्रेशन या जेल ब्रेक सेलिब्रेशन?

जब जेल में अफसर और कैदी दशहरा की मस्ती में झूम रहे थे, राजा और चंद्रकांत Mission Freedom पर काम कर रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेल में पटाखे और पूजा की गहमागहमी के बीच इन दोनों ने “ऑपरेशन सलाखें” अंजाम दिया।

 कैसे हुआ यह हाई-फाई ‘ब्रेकआउट’?

जेल निदेशक सुशांत कुमार नाथ ने बताया कि दोनों कैदियों ने “फुल मूवी स्टाइल” में प्लानिंग की थी — पहले सलाखें काटी गईं, फिर कंबल से रस्सी बनाई गई और आखिर में दीवार फांद कर वे रात के अंधेरे में गायब हो गए। अब सवाल यह है कि — जेल के अंदर आरी आई कहां से? कथित लापरवाही के आरोप में दो वरिष्ठ जेल अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

सुरक्षा में सेंध, इनाम की घोषणा

कटक पुलिस ने फरार कैदियों की जानकारी देने वाले को ₹50,000 का इनाम घोषित किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों को सुबह 3 बजे चौद्वार के चुदाखिया इलाके में देखा गया था और माना जा रहा है कि वे बिहार या झारखंड की ओर भागे हैं। कटक और आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

किसी को छोड़ा नहीं जाएगा— डीजी नाथ

डीजी नाथ ने सख्त लहजे में कहा, “अगर किसी जेल अधिकारी की मिलीभगत पाई गई, तो उसके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज होगा। सुरक्षा में चूक के लिए कोई माफी नहीं।” यह घटना राज्य की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक में हुई है, जहां कई हाई-प्रोफाइल अपराधी और अंडरट्रायल्स रखे जाते हैं। अब सरकार ने जेल सुरक्षा की समीक्षा और मजबूती के आदेश जारी कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर मजाक उड़ाते नजर आए।
एक यूज़र ने लिखा — “ये दोनों तो Shawshank Redemption 2.0 शूट करने निकले थे!” दूसरे ने कहा — “दशहरा पर रावण जले या नहीं, दो असली रावण जरूर उड़ चले!”

यह घटना सिर्फ जेल प्रशासन के लिए नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा सबक है। जब कैदी कंबल से रस्सी बना सकते हैं, तो सिस्टम को भी सजगता की रस्सी कसनी होगी!

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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