नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान आवास बोर्ड की अधिग्रहित भूमि पर बने अवैध निर्माणों को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि यह “सरासर घोटाला” है, जिसमें “ऊपर से लेकर नीचे तक सभी की मिलीभगत” है। अदालत ने साफ कहा कि ऐसे अवैध निर्माणों को किसी भी हाल में नियमित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा, “कई पीठों ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि जमीन अतिक्रमण मुक्त हो जाए। लेकिन इस घोटाले के पीछे ताकतवर लोग हैं, जो ऐसा होने नहीं देते।” पीठ ने यह टिप्पणी राजस्थान सरकार द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें उसने राजस्थान उच्च न्यायालय के 20 अगस्त, 2025 के आदेश को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक, दिए थे सख्त निर्देश
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 20 अगस्त को अपने आदेश में राजस्थान आवास बोर्ड की भूमि पर बसी अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सरकार के 12 मार्च, 2025 के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया था कि — संबंधित भूमि पर हुए सभी अतिक्रमणों को ध्वस्त किया जाए। और जिन अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण की अनुमति दी गई, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
“निर्माणों को नियमित नहीं किया जा सकता” – सुप्रीम कोर्ट
राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में लगभग 5,000 घर बने हुए हैं। इस पर न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि, “यह एक गंभीर मामला है, जिसका उच्च न्यायालय ने पहले ही संज्ञान लिया है। दर्जनों आदेशों में कहा जा चुका है कि इन अवैध निर्माणों को नियमित नहीं किया जा सकता।”
ऊपर से नीचे तक सब इसमें मिले हुए हैं
पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “यह पूरी तरह से घोटाला है। पहले भी दर्जनों आदेश आ चुके हैं कि आप इन कब्जों को नियमित नहीं कर सकते। जमीन आवास बोर्ड की है और ऊपर से नीचे तक सब इसमें मिले हुए हैं।”
इतना बड़ा घोटाला कि हम सोच भी नहीं सकते
न्यायमूर्ति मेहता ने आगे कहा, “यह इतना बड़ा घोटाला है कि हम सोच भी नहीं सकते। अगर आप उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं करते, तो हम सुनिश्चित करेंगे कि पूरा अवैध निर्माण ध्वस्त हो।”पीठ ने राज्य सरकार को याचिका वापस लेने की अनुमति दी और उसे निर्देश दिया कि उचित राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाए।
मामला क्या है
राजस्थान आवास बोर्ड की कई अधिग्रहित जमीनों पर पिछले कुछ वर्षों में अवैध कॉलोनियों और निर्माणों का फैलाव हुआ है।
आरोप है कि कुछ स्थानीय अधिकारी, प्रॉपर्टी डीलर और राजनैतिक रसूख वाले लोग मिलीभगत से इन भूखंडों पर कब्जा कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस पर पहले भी कई बार राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन कार्रवाई ठप रही। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अब इस मामले में नया मोड़ ला सकती है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







