Karauli News: मृत व्याख्याता का तबादला देख फिर छलक पड़े परिजनों के आंसू, शिक्षा विभाग की सूची पर उठे सवाल

राजस्थान में एक ओर सरकार संवेदनशील शासन और मानवीय व्यवस्था की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग की एक लापरवाही ने करौली जिले के एक परिवार के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी तबादला सूची में ऐसा नाम शामिल कर दिया गया, जिसे दुनिया छोड़े दो महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। करौली जिले के हिंडौन क्षेत्र के निवासी और इतिहास विषय के व्याख्याता रहे संतराज माली, जिनका नवंबर माह में निधन हो गया था, उनका तबादला सूची में देखकर न सिर्फ शिक्षा जगत स्तब्ध रह गया, बल्कि उनके परिजनों की आंखें भी नम हो गईं।

सूची में दिखा नाम, यादें बन गईं बोझ

जब 9 जनवरी को इतिहास विषय के व्याख्याताओं की ‘जंबो’ तबादला सूची सामने आई और विद्यालय प्रधानों ने अपने-अपने स्कूलों से जुड़े नाम तलाशने शुरू किए, तो एक नाम ने सभी को चौंका दिया। सूची में संतराज माली का तबादला हिंडौन के पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से धौलपुर जिले के गांव सिलावट स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दर्शाया गया था। जिस नाम को परिवार अभी तक यादों में संभाल कर जी रहा था, वही नाम सरकारी दस्तावेज में सक्रिय कर्मचारी की तरह दर्ज था। यह दृश्य परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं था।

“सरकारी कागजों में जिंदा, हकीकत में नहीं”

परिजनों का कहना है कि वे अभी भी संतराज माली के जाने के गम से उबर नहीं पाए थे। तभी अचानक उनका नाम तबादला सूची में देखकर ऐसा लगा, मानो व्यवस्था ने उनकी पीड़ा को समझने से ही इनकार कर दिया हो। शिक्षा विभाग की इस चूक ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तबादलों की प्रक्रिया सिर्फ फाइलों तक सीमित होकर रह गई है?

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

गौरतलब है कि हाल ही में अदालत ने शिक्षा विभाग द्वारा बीच सत्र में किए जा रहे तबादलों पर तल्ख टिप्पणी की थी। इसके बावजूद सरकार ने शुक्रवार को व्याख्याताओं की तबादला सूची जारी कर दी। इससे एक दिन पहले उप प्राचार्य और उप जिला शिक्षा अधिकारियों (शारीरिक शिक्षा) के भी स्थानांतरण किए गए थे। इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं — क्या सूची जारी करने से पहले कर्मचारियों का रिकॉर्ड तक नहीं देखा गया? मृत व्याख्याता का नाम तबादला सूची में आने के बाद शिक्षा विभाग के गलियारों में दिनभर इसी त्रुटि की चर्चा होती रही। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की गलतियां न केवल विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी ठेस पहुंचाती हैं।

परीक्षाओं के बीच तबादले, बढ़ती परेशानी

अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू होने वाला है और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी से आरंभ होंगी। ऐसे में लगातार हो रहे तबादले न सिर्फ शिक्षकों, बल्कि छात्रों के लिए भी परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। पाठ्यक्रम अधूरा है और समय बेहद कम।

निष्कर्ष

करौली की यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि संवेदनहीन व्यवस्था का आईना है। जिस शिक्षक ने अपना जीवन शिक्षा को समर्पित किया, उसका नाम सरकारी कागजों में इस तरह आना, पूरे सिस्टम पर सोचने को मजबूर करता है। अब देखना होगा कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय इस गंभीर चूक पर क्या कार्रवाई करता है — क्योंकि कुछ गलतियां सिर्फ सुधार नहीं, संवेदना भी मांगती हैं

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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