जयपुर/बाड़मेर। राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आते नजर आ रहे हैं। जहां हाल ही में कोटा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की मौजूदगी में पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot और Sachin Pilot एक साथ दिखाई दिए, वहीं बायतु विधायक और मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी Harish Chaudhary के बयान ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। बाड़मेर जिले में आयोजित वीर तेजाजी मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में हरीश चौधरी ने सार्वजनिक मंच से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अपने संबंधों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद से उनके और गहलोत के बीच संवाद लगभग समाप्त हो चुका है।
“लोकसभा चुनाव के बाद रामा-श्यामा बंद”
समारोह को संबोधित करते हुए हरीश चौधरी ने कहा कि वह धार्मिक मंच पर ज्यादा राजनीतिक बातें नहीं करना चाहते, लेकिन सच्चाई छिपाना भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद से उनकी और अशोक गहलोत की बातचीत बंद है। चौधरी ने कहा कि अब उनके बीच सीधे संवाद की कोई स्थिति नहीं है। यदि बाड़मेर सांसद Ummedaram Beniwal कोई संदेश लेकर आते हैं तो वह उसे सुन लेते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर कोई संपर्क नहीं है।
पुराने मतभेद फिर चर्चा में
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरीश चौधरी और अशोक गहलोत के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों पर दोनों नेताओं के विचार सार्वजनिक रूप से अलग-अलग दिखाई दिए हैं। चौधरी पहले भी ओबीसी आरक्षण, पूर्व सैनिकों के कोटे, बाड़मेर की स्थानीय राजनीति और कांग्रेस के संगठनात्मक फैसलों को लेकर गहलोत सरकार की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने कई बार यह भी कहा था कि पार्टी में कुछ फैसले जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप नहीं लिए गए।
परिवारवाद पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान हरीश चौधरी ने वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राजनीति में उनका कोई पारिवारिक आधार नहीं रहा और जो भी पहचान मिली है, वह जनता के समर्थन की बदौलत मिली है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का कोई सदस्य सक्रिय राजनीति में नहीं है और उनकी सबसे बड़ी ताकत आम जनता है। चौधरी ने खुद को “जनता का नेता” बताते हुए कहा कि वह पर्दे के पीछे होने वाले राजनीतिक समझौतों में विश्वास नहीं रखते।
चौहटन की राजनीति पर भी बोले
स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी करते हुए हरीश चौधरी ने चौहटन क्षेत्र की राजनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने विभिन्न नेताओं के जनाधार और राजनीतिक प्रभाव को लेकर संकेतात्मक टिप्पणियां कीं और क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर इशारा किया। उन्होंने राज्य सरकार में मंत्री K.K. Vishnoi और मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma का भी जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता और प्रशासनिक प्रभाव का स्थानीय राजनीति पर असर दिखाई देता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के चयन को लेकर हरीश चौधरी ने कहा कि राजनीति में कई बार ऐसे घटनाक्रम होते हैं जिन्हें भाग्य और परिस्थितियों का परिणाम माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति का समय आता है तो उसे आगे बढ़ने से रोकना मुश्किल होता है।
कांग्रेस में एकता के दावों के बीच बढ़ी चर्चा
हरीश चौधरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस नेतृत्व लगातार पार्टी में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। गहलोत और पायलट की हालिया मुलाकातों को भी पार्टी के भीतर समन्वय के संकेत के रूप में देखा गया था। हालांकि, चौधरी के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान कांग्रेस में कई पुराने मतभेद अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। आगामी चुनावी रणनीतियों और संगठनात्मक गतिविधियों के बीच यह बयान प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।






