भारत के स्टार मैराथन धावक सावन बरवाल ने शनिवार को एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। नागोया में आयोजित पुरुष मैराथन में बरवाल ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना ही नेशनल रिकॉर्ड बेहतर किया और नया पर्सनल बेस्ट भी दर्ज किया। बरवाल के इस प्रदर्शन ने एशियन गेम्स के पुरुष मैराथन में भारत के 44 साल लंबे मेडल के इंतजार को खत्म कर दिया। भारत ने आखिरी बार 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में पदक जीता था।
जापान के इचिटाका यामाशिता ने जीता गोल्ड
पुरुष मैराथन में जापान के इचिटाका यामाशिता ने 2 घंटे 10 मिनट 49 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। बरवाल उनसे 48 सेकंड पीछे रहे। चीन के पेइयू फेंग ने 2 घंटे 12 मिनट 13 सेकंड के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। बरवाल ने पूरे 42.195 किलोमीटर की रेस में लगातार मजबूत चुनौती पेश की और लंबे समय तक पदक की स्थिति में बने रहे। अंतिम चरण में जापानी धावक ने अपनी रफ्तार बढ़ाकर बढ़त बनाई, जबकि बरवाल ने अपनी स्थिति कायम रखते हुए सिल्वर पर कब्जा किया।
नेशनल रिकॉर्ड भी किया अपने नाम
सावन बरवाल का यह प्रदर्शन सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2:11:37 का समय निकालकर अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले उन्होंने अप्रैल 2026 में रॉटरडैम मैराथन में 2:11:58 का समय निकालकर शिवनाथ सिंह के 1978 से चले आ रहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। यानी कुछ ही महीनों में बरवाल ने अपने राष्ट्रीय रिकॉर्ड में 21 सेकंड का सुधार किया है। खास बात यह भी है कि एशियन गेम्स का मैराथन उनके करियर का केवल दूसरा प्रतिस्पर्धी मैराथन था।
1982 के बाद पहली बार मिला पदक
एशियन गेम्स के पुरुष मैराथन में भारत का पिछला पदक 1982 में आया था। दिल्ली में हुए उस संस्करण में होसुर कुक्कप्पा सीतारामन ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इससे पहले 1951 के दिल्ली एशियन गेम्स में छोटा सिंह ने गोल्ड और सुरत सिंह माथुर ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। इसके बाद चार दशक से ज्यादा समय तक भारतीय पुरुष मैराथन धावक एशियन गेम्स में पोडियम तक नहीं पहुंच सके। बरवाल ने जापान में सिल्वर जीतकर इस लंबे इंतजार को समाप्त किया।
ट्रैक रनर से मैराथन स्टार बनने तक का सफर
सावन बरवाल का मैराथन करियर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने लंबे समय तक ट्रैक इवेंट्स में हिस्सा लिया और बाद में मैराथन की ओर रुख किया। अप्रैल में रॉटरडैम में अपने पहले प्रतिस्पर्धी मैराथन में उन्होंने 2:11:58 का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। उसी प्रदर्शन से उन्होंने एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई किया था। एशियन गेम्स में उनका दूसरा ही प्रतिस्पर्धी मैराथन ऐतिहासिक साबित हुआ। बरवाल ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तो बेहतर किया ही, साथ ही भारत को 1982 के बाद पुरुष मैराथन में पहला एशियन गेम्स मेडल भी दिला दिया।
भारत के लिए एथलेटिक्स में एक और बड़ी उपलब्धि
सावन बरवाल का सिल्वर एशियन गेम्स 2026 में भारत के एथलेटिक्स अभियान के लिए भी अहम उपलब्धि है। नागोया में उनकी सफलता ने यह दिखाया कि भारतीय लंबी दूरी की दौड़ में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत प्रदर्शन कर सकते हैं।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








