बारां में नरेश मीणा का आमरण अनशन नौवें दिन भी जारी, शुगर लेवल गिरने से बढ़ी चिंता

राजस्थान के बारां में किसान नेता नरेश मीणा का आमरण अनशन नौवें दिन भी जारी है। लगातार अनशन के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उनका शुगर लेवल कम हो गया है और उन्हें लगातार पानी की उल्टियां हो रही हैं। लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण उनके वजन में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। उनकी सेहत को लेकर परिजन, ग्रामीण और समर्थक चिंतित हैं और लगातार उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

हालांकि, नरेश मीणा अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए समर्थकों से अपील की है कि उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए मजबूर नहीं किया जाए। उनका कहना है कि किसानों और आमजन की समस्याओं का समाधान होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

2 अक्टूबर से अनशन पर बैठे हैं नरेश मीणा

किसानों और आमजन से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर नरेश मीणा ने 2 अक्टूबर को बारां में आमरण अनशन शुरू किया था। प्रशासन के साथ बातचीत में समाधान नहीं निकलने के बाद वे अपने समर्थकों के साथ जयपुर के लिए पैदल मार्च पर निकले थे। 7 अक्टूबर को शिवदासपुरा टोल पर उन्हें रोक दिया गया था। अधिकारियों की ओर से आश्वासन मिलने के बाद वे गांव लौट आए, लेकिन उन्होंने अपना अनशन जारी रखा। अब नौवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर से आंदोलन को लेकर चिंता बढ़ गई है।

नरेश मीणा ने समर्थकों से की खास अपील

नरेश मीणा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपने समर्थकों से कहा है कि उन्हें अनशन तुड़वाने के लिए मजबूर न किया जाए। उन्होंने इस आंदोलन को केवल अपनी लड़ाई न बताते हुए किसानों और आम लोगों के अधिकारों से जुड़ा संघर्ष बताया है। उनका कहना है कि जब तक किसानों की समस्याओं और आमजन की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, उनके परिजन और समर्थक उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं।

नरेश मीणा की प्रमुख मांगें क्या हैं?

नरेश मीणा ने किसानों की समस्याओं को लेकर प्रदेश स्तर पर कई मांगें उठाई हैं। इनमें डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना, खाद की कालाबाजारी रोकना और चंबल तथा बीसलपुर नहरों से अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना शामिल है। इसके अलावा खेती के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने, लंबित कृषि बिजली कनेक्शन जारी करने और फसल खराबे का सर्वे कराकर किसानों को बीमा क्लेम तथा उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। कृषि यंत्रों पर सब्सिडी, फसलों का उचित मूल्य और किसानों को निःशुल्क बजरी उपलब्ध कराने के साथ संबंधित मुकदमे वापस लेने की मांग भी शामिल है। नरेश मीणा ने जेलों में बेहतर व्यवस्थाएं और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है।

बारां जिले की स्थानीय समस्याओं को लेकर भी आंदोलन

नरेश मीणा ने बारां जिले की विभिन्न स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग भी रखी है। इनमें नाहरगढ़-जलबाड़ा क्षेत्र में वन विभाग की कथित मनमानी रोकना, कवाई-चौकी प्लांट में स्थानीय लोगों को रोजगार और उचित वेतन दिलाना तथा गणेशगंज लिफ्ट नहर की मोटरें ठीक कराकर पानी की आपूर्ति बहाल करना शामिल है। इसके साथ ही अवैध शराब कारोबार पर रोक लगाने और दुग्ध उत्पादकों का बकाया भुगतान दिलाने की मांग भी उठाई गई है।

बिगड़ती सेहत के बीच आंदोलन पर सबकी नजर

नरेश मीणा की तबीयत बिगड़ने की जानकारी के बाद उनके परिवार और समर्थकों की चिंता बढ़ गई है। उनकी मांगों को लेकर प्रशासन के साथ आगे क्या बातचीत होती है और आंदोलन का क्या रुख रहता है, इस पर नजर बनी हुई है। लगातार अनशन के दौरान शुगर लेवल कम होना और बार-बार उल्टी होना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में तत्काल चिकित्सकीय जांच और निगरानी जरूरी है। अनशन समाप्त करने या जारी रखने को लेकर अंतिम निर्णय के बीच उनकी सेहत सबसे अहम मुद्दा बनी हुई है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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