जयपुर: राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। गांवों की सरकार में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए कई नेताओं ने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतारा है। कहीं पत्नी चुनाव लड़ रही है तो कहीं बेटे, बेटी, भाई और भाभी को टिकट दिलाया गया है। पंचायत समिति सदस्य से लेकर जिला परिषद सदस्य और जिला प्रमुख पद की दावेदारी तक, कई क्षेत्रों में राजनीतिक परिवारों का प्रभाव देखने को मिल रहा है।
सीकर, नागौर, बांसवाड़ा, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और डूंगरपुर समेत कई जिलों में नेताओं के परिजन चुनावी मुकाबले में हैं। इन उम्मीदवारों की मौजूदगी ने स्थानीय चुनावों को दिलचस्प बना दिया है। खास तौर पर जिला प्रमुख और पंचायत समिति प्रधान के संभावित दावेदारों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
झाबर सिंह खर्रा के परिवार की दोहरी दावेदारी
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार की श्रीमाधोपुर क्षेत्र में चुनावी दावेदारी चर्चा में है। उनकी पत्नी शांति देवी भाजपा के टिकट पर पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, उनके बेटे अजय खर्रा भी भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका एक अन्य बेटा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ रहा है।
एक ही परिवार के कई सदस्यों के चुनाव लड़ने से श्रीमाधोपुर में मुकाबला रोचक हो गया है। अब चुनाव परिणाम बताएंगे कि मतदाता परिवार के इन प्रत्याशियों को कितना समर्थन देते हैं।
नागौर से उदयपुर तक नेताओं के परिजन मैदान में
नागौर जिला परिषद के वार्ड 15 से पूर्व विधायक सुखाराम नेतड़िया भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, नागौर और सीकर में जिला प्रमुख पद की दौड़ से जुड़े कई नेताओं के रिश्तेदार भी चुनावी मैदान में हैं।
उदयपुर जिले के मावली क्षेत्र में विधायक पुष्कर लाल डांगी के पुत्र शांतिलाल जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें जिला प्रमुख पद के दावेदार के तौर पर भी देखा जा रहा है। इस तरह पंचायत चुनाव में राजनीतिक अनुभव के साथ पारिवारिक संबंध भी उम्मीदवारों की चर्चा का अहम हिस्सा बने हुए हैं।
जिला प्रमुख पद की दौड़ में नेताओं के रिश्तेदार
जिला प्रमुख का पद जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से कई नेता अपने परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों के चुनावी मैदान में होने को लेकर चर्चा में हैं।
नागौर में मंत्री डॉ. मंजू शर्मा बाघामार की जेठ की बेटी श्वेता पंवार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। पूर्व विधायक मंजू मेघवाल के जेठ शंकरलाल कांग्रेस की ओर से मैदान में बताए गए हैं। सीकर में भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़ की पत्नी गणपति भाजपा प्रत्याशी हैं, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा हरिराम रणवा के छोटे भाई की पत्नी सुनिता रावणा भी चुनाव लड़ रही हैं।
बांसवाड़ा में विधायक अर्जुन बामनिया के बेटे विकास बामनिया कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। कोटा में देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह की पत्नी निकिता कांग्रेस से और पूर्व जिला परिषद सदस्य डॉ. बद्री गोचर की पत्नी रंजना गोचर भाजपा से चुनाव लड़ रही हैं। बीकानेर में पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल की पुत्री सरिता चौहान कांग्रेस की प्रत्याशी हैं, जबकि भीलवाड़ा में पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर की पत्नी सरोज देवी गुर्जर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।
इन उम्मीदवारों के चुनावी प्रदर्शन पर राजनीतिक दलों की भी नजर रहेगी, क्योंकि जिला परिषद के नतीजे जिला प्रमुख के चयन की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रधान पद की दौड़ में भी परिवार के सदस्य
पंचायत समिति प्रधान बनने की दावेदारी को लेकर भी कई राजनीतिक परिवार सक्रिय नजर आ रहे हैं। नागौर में सांसद हनुमान बेनीवाल की बहन दाखू देवी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। श्रीमाधोपुर में मंत्री झाबर सिंह खर्रा की पत्नी शांति देवी और बेटे अजय खर्रा भाजपा प्रत्याशी हैं।
खंडेला में पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला की पत्नी पार्वती कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। सीकर के पिपराली क्षेत्र में सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर के भाई बाबूसिंह बाजौर भाजपा प्रत्याशी बताए गए हैं।
इसके अलावा, उपलब्ध सूची के अनुसार, पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल के पुत्र गौरव चौहान कांग्रेस के टिकट पर छत्तीसगढ़ क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। सागवाड़ा में विधायक शंकरलाल डेचा की पुत्री शांति डेंडोर भाजपा से और पूर्व सांसद कनकमल कटारा की पुत्रवधू वर्षा कटारा भाजपा से मैदान में हैं। सीमलवाड़ा में पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा के पुत्र महेंद्र भगोरा कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।
अहाड़ा में पूर्व जिला प्रमुख माधवलाल वरहात की पत्नी नीरूदेवी वरहात भाजपा से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि आसपुर में पूर्व विधायक गोपीचंद मीणा के पुत्र जितेंद्र मीणा भाजपा प्रत्याशी बताए गए हैं।
डूंगरपुर में पूर्व विधायकों की भी नजर जिला प्रमुख की कुर्सी पर
डूंगरपुर जिले में जिला प्रमुख पद को लेकर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। पूर्व विधायक अनिता कटारा जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं। उन्हें जिला प्रमुख पद का दावेदार माना जा रहा है। अनिता कटारा पूर्व मंत्री कनकमल कटारा की पुत्रवधू भी हैं।
भाजपा के पूर्व विधायक देवेन्द्र कटारा भी जिला प्रमुख की दौड़ में बताए जा रहे हैं। वहीं, पूर्व विधायक पूंजीलाल परमार कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। डूंगरपुर में भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) के जिलाध्यक्ष प्रसून मसार भी जिला प्रमुख पद तक पहुंचने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
इस तरह जिले में भाजपा, कांग्रेस और बीएपी से जुड़े नेताओं के बीच जिला प्रमुख पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। चुनाव परिणाम और जिला परिषद में दलों की स्थिति आगे की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पंचायत चुनाव में परिवारवाद बना चर्चा का विषय
राजस्थान के पंचायत चुनाव में नेताओं के परिजनों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने परिवारवाद की बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। समर्थकों के लिए यह राजनीतिक परिवारों के अनुभव और जनसंपर्क का लाभ हो सकता है, जबकि आलोचक इसे स्थानीय राजनीति में नए चेहरों के अवसरों से जोड़कर देखते हैं।
हालांकि, चुनाव में अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में है। पंचायत समिति और जिला परिषद के नतीजे ही तय करेंगे कि किन उम्मीदवारों को जनता का समर्थन मिलता है और जिला प्रमुख व प्रधान पदों की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







