पटना: बिहार की राजनीति इस वक्त अपने सबसे बड़े निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद अब राज्य में नए सत्ता समीकरणों ने जोर पकड़ लिया है। सूत्रों के अनुसार, रविवार (12 अप्रैल) को पटना में एनडीए (NDA) की एक महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना है, जिसमें बिहार के अगले मुख्यमंत्री और नई सरकार के स्वरूप पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। राजनीतिक सरगर्मियों को देखते हुए जदयू, भाजपा और अन्य सहयोगी दलों ने अपने सभी विधायकों को आज 11 अप्रैल की शाम तक हर हाल में पटना पहुँचने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि 12 या 13 अप्रैल को होने वाली एनडीए विधायक दल की बैठक में ही नेता का चुनाव कर लिया जाएगा।
नीतीश का दिल्ली से पटना आगमन और बैठकों का दौर
राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार शनिवार को पटना लौटे। पटना पहुँचते ही उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी बैठक की। सरकार बदलने की स्थिति में जदयू की भूमिका, नई कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या और संभावित चेहरों पर विस्तार से मंथन हुआ।हालांकि, मंत्री विजय चौधरी ने फिलहाल सरकार बदलने की खबरों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, लेकिन विधायकों को पटना बुलाना किसी बड़े बदलाव का स्पष्ट संकेत है।
बीजेपी की रणनीति: दिल्ली के बजाय पटना में होगा फैसला
शुक्रवार को दिल्ली में विनोद तावड़े के आवास पर होने वाली बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक टल गई है। अब रणनीति में बदलाव करते हुए तय किया गया है कि पहले पटना में एनडीए के भीतर आम सहमति बनाई जाएगी, उसके बाद दिल्ली में उस पर अंतिम मुहर लगेगी। चर्चा है कि नई सरकार में बीजेपी की भूमिका बेहद प्रभावी होगी और महत्वपूर्ण विभाग बीजेपी के कोटे में जा सकते हैं। मुख्यमंत्री की रेस में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है, हालांकि उनके पुराने विवादों को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं।
संभावित टाइमलाइन: कब क्या होगा?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिहार की नई सरकार का रोडमैप कुछ इस तरह हो सकता है:
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12-13 अप्रैल: पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक और नेता का चुनाव।
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14 अप्रैल: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
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15 अप्रैल: नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह और नई सरकार का गठन।
बिहार में इस बार सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि पूरी कैबिनेट का स्वरूप बदला हुआ नजर आ सकता है। बीजेपी इस बार ‘ड्राइविंग सीट’ पर रहने की तैयारी में है, जबकि जदयू अपनी नई भूमिका को लेकर सामंजस्य बिठा रही है। अगले 48 घंटे बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







