मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां पैदा हुआ संकट सीधे वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कई दिनों से इस क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक बाजार के लिए चिंता का विषय बन जाती है।
ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर के पार
भारतीय समयानुसार सोमवार सुबह करीब 10 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत करीब 104.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इससे पहले रविवार को कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी और यह 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गई थी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ रही है, जिसका असर तेल की कीमतों में तेजी के रूप में दिख रहा है।
ट्रंप ने देशों से मांगा सहयोग
इस बीच Donald Trump ने कई देशों से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने के लिए सहयोग की अपील की है। उन्होंने China, Japan, France और United Kingdom जैसे देशों से इस मिशन में समर्थन देने की बात कही है।हालांकि अभी तक इन देशों की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर NATO देशों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है तो यह गठबंधन के भविष्य के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव
मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। इससे दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध शुरू होने से पहले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से रोजाना औसतन 138 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 5 जहाज प्रतिदिन रह गई है। UK Maritime Trade Operations के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद इस क्षेत्र में कम से कम 16 व्यावसायिक जहाजों पर हमले भी हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और कई देशों की महंगाई दर पर भी देखने को मिल सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







