77 साल पुराने कानून को बदलेगी केंद्र सरकार, कोयला मजदूरों के भविष्य में आएंगे ये बड़े बदलाव

देश के कोयला खदानों में काम करने वाले लाखों मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार ने उनकी सामाजिक सुरक्षा और पेंशन लाभ को मजबूत करने के लिए एक नया ड्राफ्ट बिल जारी किया है। यह प्रस्तावित कानून ‘कोल माइंस एम्प्लॉयज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स बिल, 2025’ सात दशक से भी अधिक पुराने, सन 1948 के कानून की जगह लेगा।

क्यों लाया जा रहा है नया बिल?

वर्तमान में कोयला खदान कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF), पारिवारिक पेंशन और बीमा योजनाओं का गठन कोल माइंस प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1948 के तहत किया गया था। सरकार का मानना है कि 77 साल पुराना यह कानून अब वर्तमान समय की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। नए बिल का उद्देश्य इन प्रावधानों को डिजिटलाइजेशन, श्रम संहिताओं, लैंगिक समानता और आधुनिक विवाद निपटारा तंत्र के अनुरूप ढालना है।

मजदूरों के लिए क्या बदलेगा? जानें नए बिल की 5 बड़ी बातें

  1. नए बोर्ड का गठन: पुराने बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की जगह अब एक ‘कोल माइंस एम्प्लॉयज प्रोविडेंट फंड बोर्ड’ का गठन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे कोष के प्रबंधन और निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी।

  2. महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा: बिल में एक अहम बदलाव यह है कि कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली छह सदस्यीय कमेटी में कम से कम एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य किया गया है। इससे बोर्ड में लैंगिक संतुलन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

  3. भविष्य निधि (PF) की समयबद्ध वसूली: नए कानून में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है कि कर्मचारियों का PF धन समय पर उन्हें मिल सके। नियोक्ताओं की जिम्मेदारी तय की जाएगी ताकि भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।

  4. अपराधों का डी-क्रिमिनलाइजेशन: पुराने कानून के तहत कई उल्लंघनों के लिए जेल की सजा का प्रावधान था। नए बिल में इनमें से कई मामलों को आंशिक रूप से डी-क्रिमिनलाइज कर दिया गया है। अब ऐसे ज्यादातर उल्लंघनों के लिए जेल के स्थान पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकेगा।

  5. न्यायनिर्णायन अधिकारी (Adjudicating Officer): बिल के तहत एक न्यायनिर्णायन अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो उल्लंघनों की जांच करके जुर्माने की राशि तय करेगा।

श्रम संहिताओं के साथ तालमेल

इस नए ड्राफ्ट बिल को हाल ही में पारित चार प्रमुख श्रम संहिताओं के साथ जोड़ा गया है:

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020)

  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता (2020)

  • औद्योगिक सम्बन्ध संहिता (2020)

  • मजदूरी संहिता (2019)

इस एकीकरण का उद्देश्य कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों को अन्य क्षेत्रों के श्रमिकों के समान ही आधुनिक और समान सुरक्षा उपाय प्रदान करना है।

क्यों है यह कदम अहम?

भारत के कोयला क्षेत्र में सीधे तौर पर लगभग 3.5 लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं और लाखों परिवारों की आजीविका इस पर निर्भर है। ऐसे में, इन श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति后的 जीवन को सुरक्षित करने के लिए इस पुराने ढांचे को आधुनिक बनाना एक जरूरी कदम माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इस बिल से खनन क्षेत्र के कर्मचारियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी। साथ ही, डिजिटल सिस्टम से पीएफ खातों का प्रबंधन और ट्रैकिंग भी आसान हो जाएगा।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

Leave a Comment