भारतीय क्रिकेट का एक ऐसा अध्याय, जिसे धैर्य, साहस और समर्पण ने गढ़ा था, आज समाप्त हो गया। रविवार को टीम इंडिया के भरोसेमंद बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी।
पुजारा, जिन्होंने एक दशक से अधिक समय तक टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की रीढ़ बनकर बल्लेबाज़ी की, अपने बल्ले से ऐसे कई पल गढ़े जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगे। राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद जब भारतीय टीम को एक नई “दीवार” की तलाश थी, तब पुजारा ने अपनी ठोस तकनीक और अडिग धैर्य से यह भूमिका निभाई। गाबा, सिडनी, रांची—इन मैदानों की गूंज में पुजारा की कई शौर्य गाथाएं दर्ज हैं। तेज़ गेंदों की बौछार सहते हुए भी न झुकना, बार-बार चोट खाने के बावजूद डटे रहना और देश को जीत दिलाना—यही था पुजारा का असली परिचय।
उनके संन्यास पर पूरा क्रिकेट जगत भावुक हो गया।
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बीसीसीआई ने उन्हें “सबसे दृढ़ और प्रशंसित टेस्ट विशेषज्ञ” बताया और उनकी ऐतिहासिक पारियों को याद किया।
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कप्तान शुभमन गिल ने लिखा, “थैंक्यू पुज्जी भाई।”
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सहवाग ने कहा, “आपका धैर्य और मेहनत प्रेरणादायक रहा।”
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वीवीएस लक्ष्मण ने गाबा टेस्ट की चोटों को याद करते हुए लिखा कि पुजारा हमेशा देश के लिए अपना सब कुछ झोंकने को तैयार रहते थे।
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वहीं ऋषभ पंत ने अपने दिल की बात रखते हुए कहा, “सिडनी से गाबा तक, मेरी बेहतरीन यादें आपके साथ हैं।”
आईपीएल फ्रेंचाइजियां भी पीछे नहीं रहीं।
चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल कहा, तो पंजाब किंग्स ने उनके शांत स्वभाव और कठिन परिस्थितियों में टिके रहने के जज़्बे को सलाम किया। पुजारा का करियर सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि उस अदम्य जज़्बे की दास्तान है जो कहता है—“क्रीज़ पर डटे रहो, क्योंकि देश तुमसे उम्मीद लगाए बैठा है।” आज भले ही उन्होंने बल्ला टांग दिया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में हमेशा लिखा जाएगा।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







