। राजस्थान के बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में गर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस ने इस सीट के लिए अपने दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। यह फैसला न केवल भाया की राजनीतिक वापसी का प्रतीक है, बल्कि कांग्रेस के लिए 2023 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर मिली हार का बदला लेने का एक सुनहरा अवसर भी है।
टिकट मिलने पर डोटासरा ने दी बधाई
उम्मीदवारी की घोषणा के तुरंत बाद, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाया को बधाई दी। डोटासरा ने कहा, “प्रमोद जैन भाया जी को अंता विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने पर हार्दिक बधाई। मुझे पूरा भरोसा है कि जनता आपके नेतृत्व और जनमुद्दों के प्रति समर्पण को आशीर्वाद देगी और कांग्रेस को विजयी बनाएगी।”
नरेश मीणा को लगा झटका, निर्दलीय उतरने की अटकलें
कांग्रेस का यह कदम स्थानीय नेता नरेश मीणा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो स्वयं टिकट की दावेदारी कर रहे थे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नाराजगी के चलते नरेश मीणा निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं, जिससे चुनावी समीकरण और उलझ सकते हैं।
क्यों हो रहा है उपचुनाव?
अंता सीट पर उपचुनाव的必要ता तब पैदा हुई जब पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा को एक मामले में सजा हुई। उन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया और राज्यपाल के पास दया याचिका दायर की, लेकिन कानूनी प्रक्रियाएं अभी भी लंबित हैं। इसी कारण से यह सीट खाली हुई और उपचुनाव की नौबत आई।
मतदाता और चुनावी रणनीति
अंता विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,27,563 मतदाता हैं, जिनमें 1,16,405 पुरुष, 1,11,154 महिलाएं और 4 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। हाल ही में मतदाता सूची में 1,336 नए मतदाताओं को जोड़ा गया है, जो किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने इस बार चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। सभी पोलिंग बूथों की वेबकास्टिंग की जाएगी और प्रत्येक बूथ पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1200 तक सीमित रखी गई है। इसके अलावा, ईवीएम की बैलेट यूनिट पर रंगीन बैलेट पेपर लगाए जाएंगे ताकि मतदाताओं को वोट डालने में आसानी हो।
दोनों दलों के लिए क्यों है अहम?
यह चुनाव BJP और कांग्रेस दोनों के लिए अपनी-अपनी ताकत आजमाने का मौका है। BJP इस सीट को बचाकर राज्य सरकार की स्थिति को मजबूत करना चाहती है, वहीं कांग्रेस पिछले चुनाव में हार का गम भुलाकर अपनी लोकप्रियता वापस पाने का प्रयास करेगी। स्थानीय मुद्दे जैसे बुनियादी ढांचा, रोजगार, कृषि संकट और पानी की समस्या इस चुनाव के प्रमुख मुद्दे बनने की संभावना है।
वैसे देखा जाये तो अंता उपचुनाव राजस्थान की राजनीति में एक ‘मिनी-जनादेश’ का रूप ले चुका है। प्रमोद जैन भाया के मैदान में उतरने से कांग्रेस का मनोबल बढ़ा है, लेकिन BJP भी अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार है। नरेश मीणा जैसे निर्दलीय उम्मीदवारों का चुनावी मैदान में उतरना इस सीट का समीकरण पूरी तरह से बदल सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







