भारत-पाकिस्तान टकराव को लेकर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अमेरिका की धरती से बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि भारत के धैर्य की परीक्षा न ली जाए और अगर पाकिस्तान ने दोबारा उकसाने की कोशिश की, तो भारत की तरफ से करारा जवाब दिया जाएगा। इसके साथ ही थरूर ने चीन को भी आगाह किया कि पाकिस्तान की सैन्य मदद कर वह दक्षिण एशिया में अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है। थरूर इस समय अमेरिका में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं, जो “ऑपरेशन सिंदूर” और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक समुदाय को भारत के रुख से अवगत कराने के लिए दौरे पर है। उन्होंने अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) में यह बयान दिया।
पाकिस्तान को चेतावनी: “उकसाया तो करेंगे ज़बरदस्त जवाब”
थरूर ने दो टूक कहा, “अगर पाकिस्तान हमें अकेला छोड़ दे, तो हम भी उसे अकेला छोड़ देंगे। लेकिन अगर वह फिर उकसाता है या आतंक को बढ़ावा देता है, तो उसे जवाबी हमले के लिए तैयार रहना होगा। हमारा संदेश साफ है—हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हमारे धैर्य को हल्के में न लें।”
चीन पर सीधा हमला: “पाकिस्तान के 81% हथियार चीन से”
थरूर ने पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के 81% सैन्य उपकरण चीन से आते हैं। “BRI (बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव) के तहत चीन का सबसे बड़ा निवेश पाकिस्तान में है—CPEC प्रोजेक्ट। इससे साफ है कि चीन पाकिस्तान के साथ सैन्य और रणनीतिक रूप से गहराई से जुड़ा है।” उन्होंने कहा कि चीन का ये जुड़ाव केवल ‘रक्षा’ तक सीमित नहीं है, कई बार यह ‘आक्रमण’ का माध्यम भी बनता है।
UNSC में ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ का नाम हटवाया
थरूर ने बताया कि हाल ही में पहलगाम हमले के बाद UNSC द्वारा जारी प्रेस बयान में पाकिस्तान और चीन के दबाव में उस आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ का नाम हटा दिया गया, जिसने हमले की जिम्मेदारी ली थी। यह अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में पाकिस्तान-चीन गठजोड़ के प्रभाव का प्रमाण है।
लड़ाई में ‘चीनी तकनीक’ का सामना: भारत की बदली रणनीति
थरूर ने यह भी बताया कि हालिया संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सेना ने चीनी ‘किल चेन’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया—इसमें रडार, GPS, विमान और मिसाइलें एक साथ नेटवर्क में जुड़कर फुर्ती से हमला कर सकती हैं। “हमने उसी समय रणनीति बदली और 11 पाकिस्तानी एयरबेस को सफलतापूर्वक निशाना बनाया, जिससे चीनी एयर डिफेंस भी ध्वस्त हुआ।”
भारत-चीन व्यापार रिश्तों का जिक्र भी
थरूर ने यह भी कहा कि राजनीतिक और सामरिक तनावों के बावजूद भारत और चीन के व्यापारिक संबंध अब भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। “भारत ने हमेशा बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं, भले ही सामने विरोधी ही क्यों न हो। लेकिन आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई का हक हम अपने पास सुरक्षित रखते हैं।”
निष्कर्ष:
शशि थरूर का यह बयान न केवल पाकिस्तान को सीधी चेतावनी है, बल्कि चीन को भी स्पष्ट संकेत है कि भारत दक्षिण एशिया में किसी भी तरह के ‘साजिशी गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगा। अमेरिका की धरती से दिया गया यह सख्त संदेश अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी ध्यान से सुनना चाहिए।
“हम युद्ध के पक्षधर नहीं, लेकिन अगर उकसाया गया तो शांत बैठने वाले भी नहीं…” – शशि थरूर
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







