सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 10-10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले के बावजूद आम जनता को राहत नहीं मिली है। शनिवार को भी देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बिना किसी बदलाव के स्थिर बनी हुई हैं। शुक्रवार को जैसे ही ड्यूटी कटौती की खबर आई, लोगों को उम्मीद थी कि ईंधन सस्ता होगा, लेकिन पेट्रोल पंप पर दाम वही पुराने नजर आए। इससे उपभोक्ताओं में निराशा साफ दिखाई दे रही है।
ग्राहकों तक क्यों नहीं पहुंची राहत?
जानकारों के मुताबिक, तेल कंपनियां पहले से ही भारी घाटे में चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri पहले ही कह चुके हैं कि तेल कंपनियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं, सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती का लाभ कंपनियों के घाटे को कम करने में चला गया, न कि सीधे ग्राहकों को।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, विकल्प यह था कि या तो कीमतों का बोझ जनता पर डाला जाए या सरकार खुद इसे वहन करे। फिलहाल सरकार ने खुद बोझ उठाने का रास्ता चुना है।
देश के प्रमुख शहरों में ताजा भाव
28 मार्च को देश के बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें इस प्रकार रहीं:
- नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.67 प्रति लीटर
- मुंबई: पेट्रोल ₹103.50, डीजल ₹90.03
- चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80, डीजल ₹92.39
- कोलकाता: पेट्रोल ₹105.41, डीजल ₹92.02
- बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92, डीजल ₹90.99
- हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46, डीजल ₹95.70
- जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21
- लखनऊ: पेट्रोल ₹94.73, डीजल ₹87.81
- चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30, डीजल ₹82.45
- पटना: पेट्रोल ₹106.11, डीजल ₹91.77
- भोपाल: पेट्रोल ₹106.17, डीजल ₹91.57
कच्चे तेल में उछाल बना बड़ी वजह
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जबकि WTI क्रूड भी करीब 100 डॉलर के आसपास है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई बाधित होने की आशंका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
आगे क्या रहेगा रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत राहत की उम्मीद कम है। हालांकि, सरकार चुनावी माहौल को देखते हुए कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर सकती है। कुल मिलाकर, एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बावजूद आम आदमी को राहत नहीं मिल पाई है और बाजार की दिशा अब पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगी।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








