भारत में 2027 में पहली बार होगी ऑनलाइन जनगणना: मोबाइल ऐप और पोर्टल के ज़रिए नागरिक खुद भर सकेंगे फॉर्म

भारत सरकार ने देश की 16वीं जनगणना को लेकर बड़ी घोषणा की है। यह जनगणना देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें नागरिक पहली बार ऑनलाइन माध्यम से खुद अपने फॉर्म भर सकेंगे। जनगणना 2027 में दो चरणों में की जाएगी, जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। केंद्र सरकार ने इसको लेकर 16 जून को राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है।

पहली बार डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप की सुविधा

सरकार एक विशेष वेब पोर्टल लॉन्च करेगी जो जनगणना के दोनों चरणों — हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (HLO) तथा जनसंख्या गणना (Population Enumeration) — के लिए काम करेगा। नागरिक इस पोर्टल या मोबाइल ऐप (Android और iOS दोनों पर) के माध्यम से अपना डेटा स्वयं दर्ज कर सकेंगे। गणनाकर्ता बाद में इस डेटा को सत्यापित कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। यह पहल गणना प्रक्रिया को आधुनिक, तेज़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

16वीं और स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना

भारत में अब तक कुल 15 बार जनगणना हो चुकी है। यह स्वतंत्र भारत की 8वीं और कुल 16वीं जनगणना होगी। इससे पहले की जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था।

34 लाख से अधिक कर्मचारियों को दी जाएगी ट्रेनिंग

देशभर में इस विशाल अभियान के लिए तीन स्तरों पर ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किए गए हैं — जिसमें पहलह है— नेशनल ट्रेनर दूसरा मास्टर ट्रेनर और तीसरा फील्ड ट्रेनर। इनके माध्यम से करीब 34 लाख गणनाकर्ता और सुपरवाइजर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे जो फील्ड में जाकर काम करेंगे।

डाटा सुरक्षा होगी प्राथमिकता

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना डाटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। डाटा संग्रहण, ट्रांसमिशन और स्टोरेज के हर चरण पर सख्त साइबर सुरक्षा नियम लागू किए जाएंगे ताकि किसी भी प्रकार की डाटा लीक या हैकिंग की संभावना न रहे। बता दें कि यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जायेगी जिसमें पहले चरण की शुरूआत 1 अप्रैल, 2026 को हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (HLO) से शुरू की जायेगी। और दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना की जायेगी जोकि 1 फरवरी, 2027 से शुरू की जायेगी। बर्फीले व दुर्गम क्षेत्रों — जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड — में यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर, 2026 से प्रारंभ होगी।

पहली बार जाति आधारित जानकारी
इस जनगणना में पहली बार प्रत्येक परिवार के सदस्यों की जातिगत जानकारी भी एकत्र की जाएगी, जो समाजशास्त्रीय और विकासात्मक नीतियों के निर्माण में सहायक मानी जा रही है।

डिजिटल जनगणना क्यों है खास?
पहली बात तो यह कि नागरिकों को स्वयं फॉर्म भरने की सुविधा मिलेगी। वहीं सारा काम ​डिजिटल होने के कारण तेज़ डाटा प्रोसेसिंग और रिपोर्टिंग हो सकेगी। डेटा को तकनीक के माध्यम से केंद्रिय सर्वर पर भेजा जायेगा। यह जनगणना पर्यावरण अनुकूल होगी क्योंकि कागज़ का उपयोग बहुत कम किया जायेगा। और साथ ही पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि होगी।

निष्कर्ष:
भारत की 2027 की जनगणना न केवल जनसंख्या गणना का एक नियमित कार्य होगी, बल्कि यह डिजिटली सशक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी बनेगी। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि योजनाओं के निर्माण में भी तेजी आएगी।

 

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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