शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1350 अंक टूटा, निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये डूबे

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। दोपहर तक BSE Sensex 1350 अंकों की गिरावट के साथ 81,934 पर आ गया, जबकि Nifty 50 करीब 1.5 फीसदी टूटकर 25,327 पर कारोबार करता दिखा। गिरावट व्यापक रही और मिड व स्मॉलकैप सूचकांक भी 1 फीसदी से अधिक फिसल गए। बाजार पूंजीकरण में भारी कमी के चलते निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा दबाव Nifty IT पर दिखा, जो करीब 4.8 फीसदी टूट गया। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी और मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता

गिरावट की बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता है। हाल ही में Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ को रद्द कर दिया। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट 1962 की धारा 232 के तहत नए टैरिफ लगाने की तैयारी कर सकता है। ट्रंप ने विदेशी देशों को चेतावनी दी है कि यदि वे अमेरिकी अदालत के फैसले का समर्थन करते हैं तो उनके निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। ऐसे में वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, ट्रंप के आगामी संबोधन पर वैश्विक बाजारों की नजरें टिकी हैं और टैरिफ नीति में संभावित बदलाव से कई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। Iran में जारी अस्थिरता और अमेरिका की सख्त चेतावनियों के बीच परमाणु वार्ता का अगला दौर 26 फरवरी को प्रस्तावित है। भूराजनीतिक जोखिम बढ़ने से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है, जिससे इक्विटी बाजारों पर दबाव बना है।

आईटी शेयरों में भारी बिकवाली

आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। Nifty IT इंट्राडे में करीब 4 फीसदी गिर गया और फरवरी में अब तक लगभग 20 फीसदी टूट चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी अनिश्चितताओं और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों की आशंका के कारण टेक कंपनियों पर दबाव बना हुआ है। भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर में कमजोरी भी नकारात्मक संकेत दे रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

वैश्विक बाजार में Brent Crude की कीमत लगभग 1 फीसदी बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो छह महीने के उच्च स्तर के करीब है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है, ऐसे में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव डाल सकती हैं। इससे रुपये में कमजोरी और बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर टैरिफ, भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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