राजस्थान में गहलोत सरकार के दौरान हुए कांग्रेस विधायकों के सामूहिक इस्तीफे का मामला अभी भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रकरण को लेकर सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कांग्रेस के छह प्रमुख नेताओं—शांति धारीवाल, महेश जोशी, रफीक खान, संयम लोढ़ा, महेंद्र चौधरी, और रामलाल जाट—को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
चार सप्ताह में मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने इन नेताओं को चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम. श्रीवास्तव और जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने राठौड़ की याचिका पर विचार करते हुए इस मामले को गंभीर बताया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधायकों का इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं दिया गया था, बल्कि इसे षड्यंत्र के तहत अंजाम दिया गया।
राजेंद्र राठौड़ का दावा: “षड्यंत्र था सामूहिक इस्तीफा”
बीजेपी नेता राठौड़ ने याचिका में आरोप लगाया कि सितंबर 2022 में 81 कांग्रेस विधायकों ने दबाव में सामूहिक इस्तीफा दिया था। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि इन इस्तीफों के पीछे असली कारण क्या थे और किन परिस्थितियों में विधायकों को यह कदम उठाने पर मजबूर किया गया।
राठौड़ ने मांग की है कि इस्तीफा देने वाले विधायकों से वेतन और भत्तों की वसूली की जाए। उनका कहना है कि इस्तीफे देने के बाद भी इन विधायकों ने सभी सुविधाएं लीं, जो कि अनुचित है। इस याचिका के कारण राज्य की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है।
सामूहिक इस्तीफे की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण सितंबर 2022 का है, जब कांग्रेस के आलाकमान ने मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को जयपुर भेजा था। उस समय चर्चाएं थीं कि पार्टी सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की योजना बना रही है। इस घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस के 81 विधायक पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की बैठक में शामिल होने के बजाय शांति धारीवाल के आवास पर इकट्ठा हुए। वहां पर विधायकों ने सामूहिक रूप से इस्तीफे सौंप दिए। इन विधायकों की मांग थी कि पायलट खेमे के विधायकों में से किसी को भी मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए, खासकर उन विधायकों को, जो पहले मानेसर के होटल में ठहरे थे।
सियासी बयानबाजी तेज
इस मामले पर हाई कोर्ट के नोटिस के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गए हैं। बीजेपी इसे कांग्रेस की अंदरूनी कलह और नेतृत्व संकट का उदाहरण बता रही है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि यह मामला अब पुराना है और पार्टी के अंदर सबकुछ सामान्य हो चुका है।
अगले कदम पर टिकी नजरें
हाई कोर्ट ने कांग्रेस के छह नेताओं से जवाब तलब करने के बाद मामले को एक नई दिशा दे दी है। अब सभी की नजरें इन नेताओं के जवाब और कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रकरण राजस्थान की राजनीति में क्या नया मोड़ लाता है।
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