बाड़मेर। राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। पूर्व विधायक मेवाराम जैन की कांग्रेस में वापसी ने बाड़मेर जिले में सियासी समीकरण बदल दिए हैं। जैन के स्वागत और विरोध, दोनों धड़ों ने मोर्चा खोल दिया है।
शहर में होर्डिंग्स से गरमाया माहौल
बालोतरा से बाड़मेर तक लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनरों ने माहौल और तिक्त कर दिया है। इन पर लिखे नारे – “महिलाओं का अपमान नहीं सहेगी बाड़मेर कांग्रेस” और “बाड़मेर हुआ शर्मशार, बलात्कारी हमें स्वीकार नहीं” – ने विवाद को और हवा दी।
विरोधी खेमे की नाराज़गी
कांग्रेस के एक धड़े ने जैन की वापसी का विरोध करते हुए दिल्ली जाकर शीर्ष नेतृत्व से आपत्ति दर्ज कराई। विरोध करने वालों में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी, पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, जिलाध्यक्ष गफूर अहमद, पूर्व जिला अध्यक्ष फतेह खान, जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी, प्रदेश सचिव लक्ष्मण गोदारा और आज़ाद सिंह राठौड़ शामिल रहे।
समर्थकों में जश्न
वहीं, जैन के समर्थकों ने पटाखे फोड़कर, ढोल बजाकर और मिठाइयां बांटकर उनकी वापसी का स्वागत किया। गौरतलब है कि मेवाराम जैन को पहले अनुशासनहीनता और अश्लील वीडियो प्रकरण के चलते पार्टी से निलंबित किया गया था।
गहलोत बनाम हरीश चौधरी
इस प्रकरण ने कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन की लड़ाई को और स्पष्ट कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले अमीनखां और अब मेवाराम जैन की वापसी करवा कर अपनी पकड़ मजबूत की है। वहीं, बायतु विधायक और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी दोनों बार विरोध में खड़े दिखे। गहलोत के साथ अब अमीनखां, मेवाराम जैन, शाले मोहम्मद और मदन प्रजापत हैं, जबकि हरीश चौधरी के साथ हेमाराम चौधरी और अन्य नेता खड़े हैं।
राजनीतिक भविष्य पर असर
मेवाराम जैन का निष्कासन 22 सितंबर को रद्द हुआ और 25 सितंबर को सार्वजनिक किया गया। उनकी वापसी से कांग्रेस के अंदर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है, जिससे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बाड़मेर-जैसलमेर की राजनीति में हलचल और तेज़ होने की संभावना है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








