MSCB कथित 25 हजार करोड़ घोटाला: विशेष अदालत ने दिवंगत अजित पवार और सुनेत्रा पवार को दी क्लीन चिट

मुंबई। मुंबई की सेशन कोर्ट स्थित विशेष अदालत ने शुक्रवार को Maharashtra State Cooperative Bank (MSCB) से जुड़े कथित 25 हजार करोड़ रुपये के घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने Mumbai Police Economic Offences Wing (EOW) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar को क्लीन चिट दे दी। साथ ही उनकी पत्नी Sunetra Pawar को भी राहत प्रदान की गई।

विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने EOW की ‘सी समरी रिपोर्ट’ को मंजूरी देते हुए कहा कि मामले में किसी भी प्रकार का आपराधिक अपराध सिद्ध नहीं होता। अदालत ने माना कि तथ्यों की गलत व्याख्या के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

आपत्तियां भी हुईं खारिज

अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता Anna Hazare और अन्य याचिकाकर्ताओं की अर्जियां भी खारिज कर दीं। याचिकाओं में दावा किया गया था कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

क्या है 25 हजार करोड़ का मामला?

यह मामला MSCB से जुड़े कथित 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरण से संबंधित था। आरोप था कि 2007 से 2017 के बीच बैंक ने नियमों की अनदेखी कर कुछ चीनी मिलों और संस्थानों को भारी कर्ज वितरित किए, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान हुआ। उस समय अजित पवार बैंक के निदेशक मंडल में शामिल थे, जिसके चलते उनका नाम इस मामले में सामने आया।

लंबी जांच के बाद EOW ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि अभियोजन चलाने लायक ठोस आपराधिक सबूत नहीं मिले। इसी आधार पर अदालत ने रिपोर्ट स्वीकार कर केस को बंद कर दिया। इस फैसले के बाद अजित पवार और सुनेत्रा पवार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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