जयपुर।
राजस्थान कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत प्रदेश के 50 जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को गति देने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया के लिए अन्य राज्यों से 30 वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) बनाकर भेजा गया है। ये नेता जिलों में जाकर स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और तीन-तीन नामों का पैनल तैयार करेंगे।
राहुल गांधी करेंगे अंतिम निर्णय
प्रदेश में हाल ही में बनाए गए 10 नए जिलों में पहली बार जिलाध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे, जबकि 40 पुराने जिलों में भी नए सिरे से नियुक्तियां होंगी। पर्यवेक्षकों द्वारा तैयार किए गए पैनल दिल्ली भेजे जाएंगे, जहां एआईसीसी स्तर पर विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय राहुल गांधी लेंगे।
पुराने जिलाध्यक्षों पर मंडराया खतरा
इस कदम से कांग्रेस संगठन में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों का कहना है कि कई पुराने जिलाध्यक्षों को हटाए जाने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि भाजपा के संगठन विस्तार और स्थानीय स्तर पर बढ़ती सक्रियता को देखते हुए कांग्रेस को भी जमीनी ढांचे को मजबूत करना होगा।
रणनीति: जड़ों को फिर से मजबूत करना
राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अब अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है। जिलों में सक्रिय और स्वीकार्य चेहरों को जिम्मेदारी देकर पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने की कोशिश की जाएगी।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







