राजस्थान में 76% इलाकों में बढ़ा भू-जल स्तर, भीलवाड़ा के कोशिथल में सतह के सबसे करीब पहुंचा पानी

जयपुर: रेगिस्तानी राज्य राजस्थान से जल संरक्षण के मोर्चे पर एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में प्रदेश के 76 प्रतिशत क्षेत्रों के भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि अभी भी करीब 24 प्रतिशत इलाकों में पानी का स्तर नीचे खिसका है।

कहां सबसे ऊपर और कहां सबसे गहरा?

जनवरी 2026 में प्रदेश के 2191 स्थानों पर किए गए अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

  • सबसे ऊपर जलस्तर: भीलवाड़ा जिले के कोशिथल में भू-जल सतह से मात्र 0.01 मीटर नीचे पाया गया है।

  • सबसे गहरा जलस्तर: बीकानेर के अभयसिंहपुरा में पानी 162 मीटर की रिकॉर्ड गहराई तक पहुंच गया है।

भू-जल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आर. के. कुशवाह ने यह रिपोर्ट जल संसाधन और भू-जल विभाग के मुख्य अभियंताओं के साथ साझा की है ताकि भविष्य की कार्ययोजना तैयार की जा सके।

आंकड़ों की जुबानी: प्रदेश की जल स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भू-जल की स्थिति इस प्रकार है:

  • गंभीर स्थिति (22% स्थान): नागौर, शेखावाटी, बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर और जयपुर-दौसा जैसे जिलों में पानी 40 मीटर से भी ज्यादा गहरा है।

  • बेहतर स्थिति (11% स्थान): अजमेर, टोंक, पाली, कोटा, बूंदी और उदयपुर जैसे जिलों में पानी 2 मीटर से भी कम गहराई पर उपलब्ध है।

वृद्धि और गिरावट का विश्लेषण
  • बढ़त: प्रदेश के 67.2% स्थानों पर जलस्तर में सुधार हुआ है। सर्वाधिक वृद्धि दौसा के सायपुर पाखर में (37.66 मीटर) देखी गई। पूर्वी राजस्थान में 41.6% जगहों पर 2 मीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

  • गिरावट: लगभग 32.8% स्थानों (मुख्यतः पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान) में गिरावट देखी गई। सबसे अधिक गिरावट सीकर के धोद में (31.73 मीटर) दर्ज की गई।

फाइलों में जल संरक्षण, बारिश पर निर्भरता बरकरार

रिपोर्ट में एक कड़वी सच्चाई भी उजागर हुई है कि भू-जल स्तर में यह सुधार प्राकृतिक वर्षा पर अधिक निर्भर है। सरकारी तंत्र द्वारा जल संरक्षण के दावे अक्सर कागजों तक सीमित नजर आते हैं। हर साल लाखों लीटर वर्षा जल व्यर्थ बह जाता है, जबकि ठोस संरक्षण उपायों की कमी के कारण अभी भी कई जिले ‘डार्क ज़ोन’ की ओर बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को अनिवार्य और प्रभावी बनाया जाए, तो इन आंकड़ों में और सुधार संभव है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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