जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी है। अब आसाराम को 30 अगस्त तक जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना होगा।
हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर शामिल थे, ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह आदेश सुनाया। रिपोर्ट में कहा गया कि आसाराम की तबीयत स्थिर है और उन्हें जेल में आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा दी जा सकती है।
स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मांग रहे थे आसाराम
86 वर्षीय आसाराम ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से छह महीने की स्थायी जमानत मांगी थी। हालांकि, पहले गुजरात हाईकोर्ट ने केवल तीन महीने की जमानत दी थी। इसी अवधि को आगे बढ़ाने के लिए आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। 29 अगस्त तक जमानत मिलने के बाद उन्होंने इसे और बढ़ाने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया।
किन मामलों में सजा काट रहा है आसाराम?
आसाराम को दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
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पहला मामला (जोधपुर, 2013): नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप साबित होने पर कोर्ट ने आसाराम को आजीवन कारावास की सजा दी।
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दूसरा मामला (गुजरात, 2023): सूरत की एक महिला ने गांधीनगर आश्रम में बार-बार दुष्कर्म का आरोप लगाया था। जनवरी 2023 में इस मामले में भी उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी गई।
क्या बीमारी है आसाराम को?
जोधपुर AIIMS और अहमदाबाद सिविल अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम को कोरोनरी आर्टरी डिजीज है और वह हाई रिस्क श्रेणी में आते हैं। उन्हें नियमित निगरानी, विशेष नर्सिंग देखभाल और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श की आवश्यकता है।
हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि आवश्यकता पड़ने पर आसाराम दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें जेल में ही चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।