मारवाड़ का ‘सियासी दंगल’: भाटी-रावणा विवाद में कांग्रेस दिग्गज संयम लोढ़ा की एंट्री, DGP से सुरक्षा की मांग

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और प्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावणा के बीच सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद अब राजस्थान की सक्रिय राजनीति का केंद्र बन गया है। इस मामले ने उस वक्त बड़ा मोड़ ले लिया जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए सीधे राजस्थान पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह विभाग से गायक की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

संयम लोढ़ा का सीधा हस्तक्षेप: ‘जान को खतरा’

कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने इस विवाद को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने DGP राजीव शर्मा और गृह सचिव भास्कर सावंत को टैग करते हुए लिखा कि छोटू सिंह रावणा ने अपनी सुरक्षा को लेकर जो चिंता प्रकट की है, उस पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। लोढ़ा ने खुलासा किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से छोटू सिंह से फोन पर बात की है और उन्हें निर्भीक रहने का भरोसा दिलाया है। विपक्ष की इस सक्रियता ने अब निर्दलीय विधायक रविंद्र भाटी के लिए नई असहज स्थिति पैदा कर दी है।

भाजपा नेता के साथ फोटो ने बदला ‘नैरेटिव’

विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें गायक छोटू सिंह रावणा भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा के साथ नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि स्वरूप सिंह खारा 2023 के विधानसभा चुनाव में शिव सीट से भाजपा प्रत्याशी थे और रविंद्र सिंह भाटी के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। साजिश के आरोप: भाटी समर्थकों का दावा है कि यह पूरा विवाद ‘प्लांड’ है और रविंद्र सिंह की बढ़ती लोकप्रियता को रोकने के लिए उनके राजनीतिक विरोधियों के इशारे पर यह पटकथा लिखी गई है।

धमकी या सियासी गेम प्लान?

छोटू सिंह रावणा ने पहले ही आरोप लगाया था कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और उन पर दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, शिव विधायक के समर्थकों ने इन आरोपों को निराधार बताया है। अब जब इस मामले में कांग्रेस के बड़े नेताओं की एंट्री और भाजपा के पुराने प्रतिद्वंद्वियों की तस्वीरें सामने आई हैं, तो मारवाड़ की जनता के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह वाकई एक व्यक्तिगत विवाद है या फिर भाटी को घेरने का कोई ‘पॉलिटिकल टूल’।

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

पश्चिमी राजस्थान में इस वक्त सियासी तापमान हाई है। एक तरफ रविंद्र भाटी के समर्थक उनके साथ मजबूती से खड़े हैं, तो दूसरी तरफ कलाकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर विपक्षी दल सरकार पर दबाव बना रहे हैं। पुलिस प्रशासन के लिए अब यह मामला कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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