राजस्थान के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के तबादलों पर एक बार फिर से संशय गहराने लगा है। जहां प्राचार्य और व्याख्याताओं के तबादलों की चर्चा तेज है, वहीं द्वितीय व तृतीय श्रेणी शिक्षकों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। अनुमान है कि इन तबादलों में करीब 20 महीने और लग सकते हैं।
वजह क्या है?
शिक्षकों के तबादलों में देरी की मुख्य वजह आगामी महीनों में होने वाले विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR), निकाय चुनाव और जनगणना कार्य बताए जा रहे हैं। ये तीनों बड़े कार्यक्रम शिक्षकों की भागीदारी के बिना पूरे नहीं हो सकते। ऐसे में सरकार इन कार्यों को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। मतदाता पुनरीक्षण के लिए प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और चुनाव आयोग किसी भी समय इसे शुरू कर सकता है। इसके बाद दिसंबर में निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होगी। इसी दौरान जनगणना कार्य मार्च 2027 तक चलने का प्रस्ताव है।
शिक्षक संघों की नाराज़गी
द्वितीय श्रेणी शिक्षक जहां पिछले ढाई साल से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं तृतीय श्रेणी शिक्षक सात साल से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार को SIR शुरू होने से पहले ही तबादले कर देने चाहिए थे। शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री उपेंद्र शर्मा ने कहा: “सरकार को स्थायी तबादला नीति लागू करनी चाहिए थी। लगातार देरी से शिक्षकों में भारी निराशा है।”
कब हुए थे अंतिम तबादले?
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले 2018 में हुए थे।द्वितीय श्रेणी शिक्षकों का स्थानांतरण 15 जनवरी 2023 के बाद से नहीं हुआ है।
प्राचार्य और व्याख्याताओं की बारी
इस बीच प्राचार्य व व्याख्याताओं के तबादले लगभग तय माने जा रहे हैं। हाल ही में प्राचार्य काउंसलिंग की तिथि बढ़ने के बाद इस संभावना को और बल मिला है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







