राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला अगर संरक्षण के दायरे से बाहर होती है, तो इसके दुष्परिणाम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसका सीधा असर जल, खेती, जलवायु और आम जनजीवन पर पड़ेगा। हाल के वर्षों में अरावली को लेकर लिए गए कुछ नीतिगत और न्यायिक निर्णयों ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है।
क्या है अरावली पर्वतमाला का महत्व?
अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो गुजरात से लेकर राजस्थान और हरियाणा होते हुए दिल्ली तक फैली है। यह पर्वतमाला थार मरुस्थल को पूर्व की ओर फैलने से रोकने में प्राकृतिक दीवार का काम करती है।
अरावली के जंगल वर्षा जल को रोककर भूजल स्तर बनाए रखने, नदियों और झीलों को जीवन देने तथा जैव विविधता को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
संरक्षण हटने से क्या-क्या नुकसान होंगे?
1. भूजल संकट और गहराएगा
अरावली क्षेत्र वर्षा जल को धरती में समाहित कर भूजल रिचार्ज करता है। यदि पहाड़ और वन क्षेत्र खत्म हुए, तो राजस्थान जैसे पहले से जल-संकटग्रस्त राज्य में पानी की उपलब्धता और घटेगी। कई इलाकों में हैंडपंप और कुएं सूखने की आशंका बढ़ जाएगी।
2. मरुस्थलीकरण की रफ्तार तेज होगी
अरावली थार मरुस्थल के विस्तार को रोकती है। संरक्षण हटने से रेत के टीले पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे उपजाऊ भूमि बंजर होने का खतरा है।
3. खनन गतिविधियों में बढ़ोतरी
संरक्षण कमजोर होने पर अरावली क्षेत्र में अवैध और वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा। इससे पहाड़ कटेंगे, वन नष्ट होंगे और पर्यावरणीय असंतुलन और गहरा जाएगा।
4. वन्यजीव और जैव विविधता को खतरा
अरावली के जंगल कई वन्यजीवों और दुर्लभ वनस्पतियों का घर हैं। जंगल खत्म होने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होगा, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।
5. जलवायु पर नकारात्मक प्रभाव
अरावली क्षेत्र स्थानीय जलवायु को संतुलित रखने में मदद करता है। इसके कमजोर होने से तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा और हीटवेव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट और नई परिभाषा से बढ़ी चिंता
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार की गई एक नई परिभाषा के अनुसार 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले भूभाग को अरावली पर्वत का हिस्सा नहीं माना जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अरावली का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षण से बाहर हो सकता है, जिससे पर्यावरणीय खतरे कई गुना बढ़ जाएंगे।
राजस्थान पर समग्र प्रभाव
राजस्थान पहले ही पानी, हरियाली और उपजाऊ भूमि की कमी से जूझ रहा है। अरावली का कमजोर होना राज्य की कृषि, पशुपालन, पर्यटन और आम जनजीवन पर गहरा असर डालेगा। यही कारण है कि पर्यावरणविद और जनप्रतिनिधि अरावली को पूर्ण संरक्षण देने की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष
अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि राजस्थान के पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ है। यदि समय रहते इसके संरक्षण को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल और पर्यावरण संकट का सामना करना पड़ सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








