नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद अब वैश्विक सुर्खियों में है। अमेरिका ने भारत पर 50% का भारी टैरिफ लगाया है और इसी बीच विदेशी मीडिया ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन कॉल्स का जवाब नहीं दिया। इस पृष्ठभूमि में अमेरिका के दिग्गज अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स और रिचर्ड वोल्फ ने साफ कहा है कि भारत के पास ब्रिक्स (BRICS) और आरसीईपी (RCEP) जैसे समूहों की “मास्टर चाबी” है, जो भविष्य में अमेरिका के आर्थिक दबदबे को चुनौती दे सकती है।
अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स का बयान
जेफरी सैक्स ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के टैरिफ भारत पर दबाव बनाने में नाकाम रहेंगे। उन्होंने सलाह दी कि भारत को चीन और अन्य एशियाई देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय व्यापार साझेदारी (RCEP) और ब्रिक्स को और मजबूत करना चाहिए। उनका मानना है कि अमेरिका की मौजूदा नीतियां भारत को रूस, चीन और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के करीब ला रही हैं। “ट्रंप भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन असल में वे अमेरिका को ही विश्व अर्थव्यवस्था से अलग-थलग कर रहे हैं,” – जेफरी सैक्स
रिचर्ड वोल्फ ने भी जताई चिंता
एक अन्य अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि टैरिफ की यह रणनीति भारत जैसे देशों को मजबूर करेगी कि वे अपने निर्यात और व्यापार के नए रास्ते तलाशें। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स पहले से ही एक “बड़ा और अधिक एकीकृत आर्थिक विकल्प” बनता जा रहा है, जो पश्चिमी देशों के लिए चुनौती होगा।
भारत का बड़ा कदम – रुपये में व्यापार
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को अधिक वोस्ट्रो अकाउंट खोलने की अनुमति दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटेगी और भारत अपने साझेदार देशों के साथ रुपये में व्यापार निपटा सकेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को कमजोर कर सकता है।
डॉलर की पकड़ ढीली पड़ रही है
वर्तमान में वैश्विक व्यापार का लगभग 90% अमेरिकी डॉलर में होता है। लेकिन 2023 में यह तस्वीर बदलने लगी – करीब 20% तेल व्यापार अब गैर-अमेरिकी मुद्राओं में हो रहा है। ब्रिक्स देशों का लक्ष्य है कि भविष्य में एक साझा करेंसी विकसित की जाए, जिससे डॉलर का वर्चस्व और घट सकता है।
सुरक्षा परिषद में भारत का समर्थन करे चीन
सैक्स ने कहा कि भारत और चीन को अपने सीमा विवाद सुलझाकर आपसी व्यापार और निवेश बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करना चाहिए।
नतीजा
भारत की आर्थिक रणनीति और ब्रिक्स की ताकत अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौती बनकर उभर रही है। अगर भारत ब्रिक्स और आरसीईपी में मजबूत भूमिका निभाता है, तो आने वाले दशकों में वैश्विक आर्थिक समीकरण बदल सकते हैं।

Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।