कोलकत्ता स्थित Calcutta High Court में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अदालत कक्ष में भारी शोर-शराबे के कारण एक अहम मामले की सुनवाई टालनी पड़ी। यह याचिका Enforcement Directorate (ईडी) की ओर से दायर की गई थी, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 जनवरी को होने की संभावना है।
कोर्टरूम में अव्यवस्था, जज ने जताई नाराजगी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्टरूम खचाखच भरा होने और लगातार शोर के कारण जज को कार्यवाही आगे बढ़ाने में परेशानी हुई। हालात इतने बिगड़ गए कि वकील भी बेंच तक नहीं पहुंच सके। स्थिति को संभालने के लिए अदालत कक्ष खाली कराने की कोशिश की गई, लेकिन हंगामे के कारण सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।
ईडी के गंभीर आरोप
इससे पहले ईडी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने 8 जनवरी को कोलकाता में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान उसके अधिकारियों के काम में बाधा डाली। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई “कानून की घोर अवहेलना” थी और पुलिस ने अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। ईडी की 28 पन्नों की याचिका में कहा गया है कि राज्य पुलिस ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एजेंसी के अधिकारियों को उनके वैधानिक कर्तव्यों के पालन से रोका। इसी कारण एजेंसी को हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।
I-PAC से जुड़ा मामला और तलाशी
याचिका के अनुसार, कोयला तस्करी मामले से जुड़ी जांच के तहत ईडी ने राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC और उससे संबंधित परिसरों पर 8 जनवरी को तलाशी शुरू की थी। ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं एक परिसर में पहुंचीं और पुलिसकर्मियों की मदद से एजेंसी द्वारा जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया। एजेंसी का दावा है कि जांच में सामने आए ठोस सबूतों से संकेत मिलता है कि कम से कम 20 करोड़ रुपये की आपराधिक आय हवाला चैनलों के जरिए I-PAC को हस्तांतरित की गई थी।
ईडी का पक्ष
ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह तलाशी पूरी तरह साक्ष्य-आधारित थी और इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था। एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ नियमित जांच का हिस्सा है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए की गई।
अब 14 जनवरी को होगी सुनवाई
कोर्टरूम में हंगामे के चलते सुनवाई टलने के बाद अब इस संवेदनशील मामले पर 14 जनवरी को दोबारा बहस होने की संभावना है। इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी हलकों में पहले से ही तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, ऐसे में अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








