सावधान! इनकम टैक्स की ये फर्जी कटौती आपको खिला सकती है जेल की हवा

Income Tax Department ने टैक्स चोरी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए उन टैक्सपेयर्स को चेताया है, जिन्होंने फर्जी कटौती और झूठे दान के जरिए टैक्स कम करने या गलत रिफंड लेने की कोशिश की है। विभाग ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में अब सख्त कार्रवाई हो सकती है, हालांकि पहले चरण में टैक्सपेयर्स को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया जा रहा है।

बिचौलियों के नेटवर्क का पर्दाफाश

आयकर विभाग की जांच में सामने आया है कि देशभर में कुछ बिचौलियों और एजेंटों का संगठित नेटवर्क सक्रिय था। ये एजेंट कमीशन के बदले टैक्सपेयर्स के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते थे और इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत मिलने वाली कटौतियों को बढ़ा-चढ़ाकर या पूरी तरह मनगढ़ंत तरीके से दिखाते थे। इन फर्जी दावों का बड़ा हिस्सा रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज (RUPPs) और कुछ चैरिटेबल संस्थाओं को दिए गए कथित दान से जुड़ा पाया गया है।

सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी

इनकम टैक्स विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि कई RUPPs ऐसी थीं जो न तो नियमित रूप से रिटर्न फाइल करती थीं, न ही किसी वास्तविक राजनीतिक गतिविधि में शामिल थीं। इनके पते भी संदिग्ध पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल बेहिसाब और सीमा पार से आए पैसों को घुमाने तथा फर्जी दान की रसीदें जारी करने के लिए किया जा रहा था।

CSR और दान के नाम पर फर्जीवाड़ा

जांच के दौरान कुछ ट्रस्टों और RUPPs के खिलाफ फॉलो-अप सर्च भी की गई, जिसमें व्यक्तियों द्वारा किए गए फर्जी दान और कंपनियों द्वारा किए गए फर्जी CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) दावों से जुड़े आपत्तिजनक सबूत मिले हैं।

किन कटौतियों पर है खास नजर

Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने बताया कि डेटा एनालिटिक्स आधारित निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया गया है। इसके तहत उन मामलों को हाई-रिस्क के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां टैक्सपेयर्स ने

  • सेक्शन 80G

  • सेक्शन 80GGC

के तहत संदिग्ध कटौतियों का दावा किया है। डेटा विश्लेषण में यह भी सामने आया कि कई टैक्सपेयर्स दान पाने वाले संगठनों की प्रामाणिकता साबित करने में असफल रहे।

कई टैक्सपेयर्स ने खुद सुधारी गलती

CBDT के अनुसार, बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स ने मौजूदा असेसमेंट ईयर AY 2025-26 के लिए अपने रिटर्न संशोधित किए हैं और पिछले वर्षों के लिए अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर स्वेच्छा से गलत दावों को वापस ले लिया है।

शुरू हुआ ‘नज कैंपेन’

टैक्सपेयर्स को राहत देने के उद्देश्य से आयकर विभाग ने एक विशेष ‘नज (Nudge) कैंपेन’ शुरू किया है। इसके तहत 12 दिसंबर 2025 से चिन्हित टैक्सपेयर्स को SMS और ईमेल के जरिए सूचना भेजी जा रही है, ताकि वे समय रहते अपने रिटर्न की समीक्षा कर सकें और गलत दावों को सुधार सकें।
विभाग ने टैक्सपेयर्स को सलाह दी है कि वे अपने मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सही तरीके से रजिस्टर रखें, ताकि कोई जरूरी सूचना छूट न जाए।

नहीं सुधारी गलती तो होगी कार्रवाई

आयकर विभाग का कहना है कि यह कैंपेन उन लोगों के लिए आखिरी मौका है, जिन्होंने जानबूझकर या अनजाने में गलत दावे किए हैं। अगर तय समय में रिटर्न को सही नहीं किया गया, तो विभाग सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

निष्कर्ष:
फर्जी कटौती और झूठे दान के दावे अब आयकर विभाग की पैनी नजर में हैं। ऐसे में टैक्सपेयर्स के लिए यही बेहतर है कि वे समय रहते अपने रिटर्न की जांच कर लें और किसी भी गलती को तुरंत सुधार लें, वरना बाद में भारी जुर्माना और कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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