ईरान-इजरायल युद्ध पर भारत सतर्क: केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, रणनीति पर होगी अहम चर्चा

Iran और Israel के बीच 28 फरवरी से जारी युद्ध ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। इस बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने हालातों की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह अहम बैठक बुधवार शाम 5 बजे आयोजित होगी, जिसमें पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट, United States-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के प्रभाव और भारत की कूटनीतिक तथा रणनीतिक प्रतिक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

रक्षा मंत्रालय स्तर पर पहले ही हो चुकी है समीक्षा

सर्वदलीय बैठक से पहले रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में CDS Anil Chauhan, एयर चीफ मार्शल Amar Preet Singh, सेना प्रमुख Upendra Dwivedi और नौसेना प्रमुख Dinesh K Tripathi समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा Defence Research and Development Organisation (DRDO) के अध्यक्ष Sameer V Kamat भी बैठक में मौजूद रहे। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और भारतीय हितों की रक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

पीएम के बयान पर विपक्ष का हमला

इस बीच Narendra Modi के लोकसभा में दिए गए बयान को लेकर विपक्षी दलों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi समेत कई नेताओं ने सरकार की प्रतिक्रिया को देर से आया कदम बताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर पहले ही स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था। वहीं, Priyanka Chaturvedi ने भी सरकार के रवैये को पक्षपातपूर्ण बताते हुए आलोचना की है।

संसद में क्या बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक “अप्रत्याशित संकट” है और इससे निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। पीएम मोदी ने Strait of Hormuz में उत्पन्न बाधाओं और व्यापारिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संकट का समाधान केवल कूटनीति और संवाद के जरिए ही संभव है।

भारत की रणनीति पर सबकी नजर

इस सर्वदलीय बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भारत की आगामी विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक मंच पर रुख को लेकर ठोस निर्णय लिए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजरायल संघर्ष का असर तेल की कीमतों, व्यापारिक मार्गों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारत पर भी देखने को मिलेगा।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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