. Bengal Chunav 2026: प्रेसिडेंसी डिवीजन की 111 सीटें तय करेंगी बंगाल का अगला मुख्यमंत्री, जानें क्या है ममता और बीजेपी का पूरा गणित

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और पूरा राज्य राजनीतिक सरगर्मियों से उबल रहा है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार बंगाल में दो चरणों में मतदान संपन्न होगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग निर्धारित की गई है, जबकि नतीजों की घोषणा 4 मई को होगी। इस बार का चुनाव ममता बनर्जी के लिए अपना किला बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है, वहीं बीजेपी सत्ता में आने के लिए हर संभव दांव आजमा रही है।

पश्चिम बंगाल की सत्ता तक पहुँचने का रास्ता प्रेसिडेंसी डिवीजन की 111 सीटों से होकर गुजरता है। इतिहास गवाह है कि जिसने इस क्षेत्र पर अपना वर्चस्व कायम किया, उसी ने कोलकाता की सत्ता संभाली। साल 2006 में वाम मोर्चे ने यहाँ 72 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, लेकिन 2011 में ममता बनर्जी की आंधी ने समीकरण बदल दिए। तब टीएमसी-कांग्रेस गठबंधन ने यहाँ की 89 सीटें जीतकर पहली बार सत्ता का स्वाद चखा। इसके बाद 2016 में टीएमसी ने 91 और 2021 में अपने प्रदर्शन को और सुधारते हुए 96 सीटों पर कब्जा जमाया।

बीजेपी के लिए प्रेसिडेंसी डिवीजन हमेशा से एक कठिन चुनौती रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में शानदार वोट प्रतिशत हासिल करने के बावजूद 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी यहाँ महज 14 सीटें ही जीत सकी थी। हालांकि बीजेपी 77 सीटें जीतकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी, लेकिन दक्षिण बंगाल और विशेषकर प्रेसिडेंसी डिवीजन में विफलता की वजह से वह सत्ता के जादुई आंकड़े से दूर रह गई। 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने कुछ नए संकेत जरूर दिए हैं, जहाँ बीजेपी ने इस क्षेत्र की 21 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की है।

इस क्षेत्र का राजनीतिक महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य से लेकर स्वयं ममता बनर्जी जैसे दिग्गज मुख्यमंत्री इसी बेल्ट से चुनाव लड़कर अपनी जड़ें जमाते रहे हैं। हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में अल्पसंख्यक आबादी का बड़ा हिस्सा है, जो लंबे समय से टीएमसी का सबसे मजबूत वोट बैंक माना जाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले चुनावों में ममता बनर्जी की जीत का मुख्य आधार यही अल्पसंख्यक मत थे। हालांकि इस बार हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं की सक्रियता से इस वोट बैंक में बिखराव की संभावना है, जो मुख्यमंत्री के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

बीजेपी इस बार ममता बनर्जी के इस गढ़ में सेंध लगाने के लिए अपनी रणनीति बदल चुकी है। पार्टी का विशेष ध्यान नदिया और उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय वाले क्षेत्रों पर है। 2021 में बीजेपी ने यहाँ की जिन 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी, उनमें से 9 अकेले नदिया जिले से आई थीं। 2024 लोकसभा चुनाव में भी नदिया की 11 सीटों पर बीजेपी को बढ़त मिली है। हालांकि, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा और दक्षिण कोलकाता जैसे इलाकों में बीजेपी के लिए अभी भी खाता खोलना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सत्ता की इस जंग में देखना दिलचस्प होगा कि क्या ममता बनर्जी अपने इस सबसे मजबूत गढ़ को बचाने में कामयाब रहती हैं या बीजेपी यहाँ कोई बड़ा चमत्कार कर पाती है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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