ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद सांसद ने त्योहारों और नमाज से जुड़े विवादों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि रमजान, बकरीद और अन्य मुस्लिम धार्मिक अवसरों के दौरान जानबूझकर ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य मुसलमानों को निशाना बनाना होता है। ईद मिलाप कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि जैसे ही रमजान या बकरीद जैसे त्योहार करीब आते हैं, अजान और नमाज को लेकर विवाद खड़े किए जाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करता रहेगा और किसी भी परिस्थिति में नमाज नहीं छोड़ेगा।
‘मस्जिदों से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई’
ओवैसी ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि कई इस्लामी विद्वानों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि मस्जिदों से आजादी की लड़ाई के लिए फतवे जारी किए गए और अनेक विद्वानों ने अपनी जान तक कुर्बान कर दी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आज अजान और नमाज को लेकर आपत्ति जताने वाले लोग देश के इतिहास को भूल रहे हैं। उनके अनुसार, धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
सड़कों पर नमाज और धार्मिक जुलूसों की तुलना
सड़कों पर नमाज अदा करने को लेकर उठने वाले सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि यह कोई रोजाना की गतिविधि नहीं है, बल्कि विशेष अवसरों जैसे जुमे की नमाज या ईद के दौरान ही देखने को मिलती है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत में विभिन्न धर्मों के त्योहारों, यात्राओं और जुलूसों के दौरान भी सड़कें उपयोग में लाई जाती हैं। ऐसे में केवल एक समुदाय की धार्मिक गतिविधियों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
‘चाहे कुछ भी हो जाए, नमाज जारी रहेगी’
ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय अपने धार्मिक दायित्वों का पालन करता रहेगा। उन्होंने दावा किया कि हाल के विवादों के बाद कई युवा मस्जिदों में नियमित रूप से नमाज पढ़ने के लिए प्रेरित हुए हैं। उनके अनुसार, धार्मिक पहचान और आस्था को लेकर किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा और समुदाय अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करता रहेगा।
मांस बिक्री प्रतिबंधों पर भी उठाए सवाल
AIMIM प्रमुख ने हिंदू त्योहारों के दौरान कुछ क्षेत्रों में अंडे, मांस और चिकन की बिक्री पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फैसलों को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए और सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने आरोप लगाया कि समाज में बढ़ती नफरत का सबसे अधिक असर मुस्लिम समुदाय पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के मुसलमान कहीं जाने वाले नहीं हैं और भारत उनका भी उतना ही देश है जितना किसी अन्य नागरिक का। ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है। एक ओर उनके समर्थक इसे धार्मिक अधिकारों की आवाज बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल उनके बयान को राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहे हैं।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







