पोकरण में फिर पकड़ी गई नकली घी की फैक्ट्री, एक महीने में दूसरी बड़ी कार्रवाई

राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर का पोकरण क्षेत्र नकली घी और खाद्य पदार्थों में मिलावट के बड़े केंद्र के रूप में उभरता नजर आ रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए पोकरण के भवानीपुरा क्षेत्र में संचालित एक अवैध नकली घी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में पाम ऑयल, तैयार नकली घी और पैकिंग सामग्री बरामद की गई है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, क्योंकि पिछले महीने भी यहां से हजारों किलो मिलावटी घी और खाद्य सामग्री जब्त की गई थी।

भवानीपुरा में मकान से संचालित हो रही थी फैक्ट्री

खाद्य सुरक्षा अधिकारी किशनाराम कड़वासरा के नेतृत्व में विभागीय टीम मंगलवार शाम पोकरण पहुंची। पुलिस के सहयोग से भवानीपुरा स्थित एक मकान पर छापा मारा गया, जहां देर रात तक कार्रवाई जारी रही। जांच के दौरान मकान के अंदर नकली घी बनाने की पूरी व्यवस्था मिली। टीम ने मौके से करीब 900 किलो पाम ऑयल और 453 किलो तैयार घी बरामद किया। इसके अलावा विभिन्न ब्रांडों के लेबल, खाली टिन, पैकिंग सामग्री, ढक्कन, गैस टंकियां, भट्ठी और पैकिंग मशीन भी जब्त की गई।

बड़े ब्रांडों के नाम पर बेचा जा रहा था नकली घी

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न प्रसिद्ध ब्रांडों के नाम और पैकेजिंग का इस्तेमाल कर नकली घी बाजार में सप्लाई कर रहे थे। छापेमारी के दौरान “शक्ति”, “डेयरी बेस्ट” समेत कई अन्य ब्रांडों के लेबल और टिन बरामद हुए। अधिकारियों का मानना है कि नकली घी को असली ब्रांडेड उत्पाद के रूप में पैक कर बाजार में खपाया जा रहा था, जिससे उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा था।

एक महीने में दूसरी बड़ी कार्रवाई

गौरतलब है कि गत 24 मई को जयपुर से आई खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम ने भी पोकरण में बड़ी कार्रवाई की थी। उस दौरान 10,260 किलो मिलावटी घी, पाम ऑयल, सोयाबीन तेल, वनस्पति घी और करीब 4,000 किलो तैयार मिलावटी घी जब्त किया गया था। लगातार दूसरी बार नकली घी की फैक्ट्री पकड़े जाने से यह आशंका गहरा गई है कि क्षेत्र में मिलावट का संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

बाजार में खुलेआम बिक रहा हो सकता है नकली घी

लगातार सामने आ रही घटनाओं ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फैक्ट्रियों से बड़े ब्रांडों के लेबल और पैकिंग सामग्री मिलने के बाद उपभोक्ताओं के लिए असली और नकली घी में अंतर करना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह तैयार उत्पाद स्थानीय बाजारों और दुकानों तक पहुंच रहे हैं, जहां उपभोक्ता ब्रांड का नाम देखकर इन्हें खरीद लेते हैं।

पाम ऑयल से कैसे तैयार किया जाता है नकली घी?

जानकारों के अनुसार, नकली घी तैयार करने के लिए सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है। इसे पहले निर्धारित तापमान पर गर्म किया जाता है और फिर हाइड्रोजनीकरण प्रक्रिया के जरिए गाढ़ा एवं दानेदार बनाया जाता है। इसके बाद इसमें कृत्रिम रंग, केमिकल और एसेंस मिलाए जाते हैं ताकि इसका रंग, स्वाद और खुशबू असली घी जैसी लगे। अंतिम चरण में इसे ब्रांडेड पैकिंग में भरकर बाजार में सप्लाई कर दिया जाता है।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

फिजिशियन डॉ. अजय पाल सिंह भाटी के अनुसार, पाम ऑयल और रसायनों से तैयार नकली घी का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसे उत्पादों के सेवन से धमनियों में रुकावट, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लिवर और किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक सेवन करने पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका भी बढ़ सकती है। बच्चों के स्वास्थ्य और विकास पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

जांच जारी, बड़े नेटवर्क का संदेह

खाद्य सुरक्षा विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि नकली घी का निर्माण और वितरण किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है। अधिकारियों को आशंका है कि इस कारोबार के पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो विभिन्न जिलों में मिलावटी घी की आपूर्ति कर रहा है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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