राम मंदिर दान विवाद : कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने BJP-RSS पर साधा निशाना, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई। यह बयान ऐसे समय आया है, जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है।

सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट पर उठाए सवाल

के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि जो संगठन स्वयं को हिंदू आस्था का सबसे बड़ा संरक्षक बताते हैं, वे अब इन आरोपों के कारण सवालों के घेरे में हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

वेणुगोपाल ने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उनका कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता बनी रहेगी और सभी तथ्यों की पारदर्शी तरीके से पड़ताल हो सकेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक दर्ज एफआईआर में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रखा गया है।

FCRA और ट्रस्ट प्रबंधन पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) के तहत ट्रस्टों पर लागू नियमों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं तो सभी संबंधित पक्षों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब कथित दान घोटाले की जांच जारी है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे स्वीकार किए हैं या नहीं।

FIR दर्ज, SIT कर रही जांच

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि मंदिर में प्राप्त दान राशि में लगभग 7 से 7.5 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई है। मामले की जांच के लिए पहले ही तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी

राम मंदिर दान विवाद अब कानूनी जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है। एक ओर कांग्रेस इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है, वहीं भाजपा सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किसकी क्या भूमिका रही और आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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