नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों और युवाओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले से जुड़े सभी डिजिटल सबूतों, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग को तुरंत सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।
कोर्ट का रुख: ‘सुरक्षित रखे जाएं सभी डिजिटल सबूत’ हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं और महिलाओं पर पुलिस ने अनावश्यक और अत्यधिक बल प्रयोग किया, जो संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की आजादी) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
अदालत ने इन तर्कों पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्र को निर्देश दिया है कि मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत घटना से संबंधित कोई भी फुटेज या रिकॉर्डिंग मिटनी नहीं चाहिए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की है।
20 जुलाई को कैसे बिगड़े थे हालात? बता दें कि 20 जुलाई को नीट परीक्षा धांधली के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले हजारों छात्र जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए थे। जब प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की तरफ बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद दोनों पक्षों में झड़प शुरू हो गई। पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोलों और धक्का-मुक्की के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए थे।
महिलाओं पर बल प्रयोग के वीडियो से बढ़ा आक्रोश प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों पर भी बल प्रयोग करने की गंभीर शिकायतें सामने आईं। वायरल हुए कुछ वीडियो में पुलिसकर्मी महिला छात्रों को घसीटते हुए नजर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, लेकिन पुलिस ने बिना उकसावे के बर्बरता दिखाई। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का दावा है कि उग्र भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ने और पथराव करने की कोशिश की थी, जिसमें कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।
हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप और नोटिस के बाद अब दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को 11 सितंबर तक अदालत में अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करना होगा।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








