कोटा: राजस्थान के कोटा में चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर ली है। बोरखेड़ा थाना पुलिस ने इस मामले में पुजारी समेत सात आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया है। वहीं, मामले में निरुद्ध किए गए एक नाबालिग के खिलाफ भी पुलिस ने चालान पेश किया है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय की है।
5 जून की रात हुई थी महंत की हत्या
सीआई अजीत बागडोलिया के अनुसार, 5 जून की रात चंद्रेसल मठ में महंत देवानंद महाराज अपने कक्ष में सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर चाकुओं से हमला कर उनकी हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। मामले में 6 जून को मठ के कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन गुर्जर की रिपोर्ट पर बोरखेड़ा थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश और हत्या की वजह को लेकर गहन जांच शुरू की।
सात आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
पुलिस की जांच के बाद मामले में संतोष कुमार राय, पूर्व संत नन्दनवन उर्फ नन्हें कुमार, महावीर प्रसाद पारेता, आदित्य वर्मा, मीकल जॉर्ज, अंकित बैरवा और पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस मामले को केस ऑफिसर स्कीम के तहत लिया था। जांच पूरी होने के बाद अब इन सात आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया है। इसके साथ ही मामले में निरुद्ध एक नाबालिग के खिलाफ भी चालान पेश किया गया है।
100 पुलिसकर्मियों की टीम ने की जांच
महंत देवानंद महाराज की हत्या की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। इसमें दो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, तीन डीवाईएसपी, सात पुलिस निरीक्षक और करीब 100 पुलिसकर्मी शामिल थे। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या के पीछे मठ की संपत्ति और उसके संचालन को लेकर चल रहे विवाद को अहम वजह माना।
750 बीघा जमीन और करोड़ों की संपत्ति बनी विवाद की वजह
पुलिस जांच में सामने आया कि करीब 1100 वर्ष पुराने चंद्रेसल मठ के नाम लगभग 750 बीघा जमीन और करीब 4.33 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई गई है। पुलिस के अनुसार, पुरानी कार्यकारिणी से जुड़े अधिवक्ता संतोष राय ट्रस्ट के संचालन पर नियंत्रण हासिल करना चाहते थे। दूसरी ओर, महंत देवानंद महाराज नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता दिलाने के प्रयास कर रहे थे। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता गया।
जयपुर में भर्ती होने की साजिश का भी खुलासा
पुलिस के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद संतोष राय ने अपने करीबी आदित्य वर्मा के जरिए महंत की हत्या की साजिश रची। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के समय खुद को घटनास्थल से दूर दिखाने के लिए संतोष राय घटना से पहले जयपुर के एक अस्पताल में पैर की सर्जरी के बहाने भर्ती हो गया था। पुलिस की गहन जांच में कथित साजिश की कड़ियां सामने आने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और अब उनके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया गया है।
10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
पुलिस द्वारा जांच पूरी कर चालान पेश किए जाने के बाद अब इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







