नागौर जिले का चर्चित और दर्दनाक ‘डांगावास कांड’ एक बार फिर राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2015 के इस जघन्य हत्याकांड में विशेष SC-ST अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) देते हुए बरी किए जाने के फैसले के बाद पीड़ित परिवारों के साथ-साथ विपक्षी नेताओं ने भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर बयान जारी कर इस फैसले पर गहरी चिंता जताई है और भाजपा सरकार से पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए तत्काल कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
सचिन पायलट का भाजपा सरकार पर निशाना
सचिन पायलट ने लिखा कि मई 2015 में हुए इस दर्दनाक जमीन विवाद में 6 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें 5 दलित समाज के लोग थे। लगभग 11 वर्षों तक यह मामला जांच एजेसियों और अदालत की लंबी प्रक्रिया से गुजरता रहा।
पायलट ने सवाल उठाते हुए कहा: “विशेष SC-ST कोर्ट द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी वारदात का सच आखिर सामने क्यों नहीं आ सका? घटना भी भाजपा की पिछली सरकार के शासन में हुई थी और अब यह फैसला भी भाजपा शासन में ही आया है। सरकार इस मामले को महज एक अदालती फैसले तक सीमित न रखे, बल्कि उच्च अदालत में अपील कर पीड़ितों को न्याय दिलाए।” उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार को यह समीक्षा करनी चाहिए कि इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में जांच एवं अभियोजन (Prosecution) के स्तर पर कहां कमियां रह गईं।
क्या था डांगावास कांड?
यह घटना 14 मई 2015 की है, जब नागौर जिले के डांगावास गांव में जमीन के मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया था। इस दौरान ट्रैक्टर से कुचलकर और बेरहमी से मारपीट कर एक पक्ष के 5 दलितों और एक अन्य युवक सहित कुल 6 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
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जांच का घटनाक्रम:
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शुरुआत में स्थानीय पुलिस और सीआईडी (CID) ने मामले की तफ्तीश की।
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पीड़ित परिवारों की मांग और जनआक्रोश को देखते हुए मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया।
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सीबीआई ने गहन जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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वर्ष 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस ने दबिश देकर सभी 40 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा था।
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‘अब हम हाईकोर्ट जाएंगे’ — पीड़ित पक्ष
अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मृतक के रिश्तेदार गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि यद्यपि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन कोर्ट के सामने अभियोजन पक्ष द्वारा आधी-अधूरी जानकारी पेश की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि “यदि कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया है, तो फिर हमारे परिवार के 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की?” पीड़ित पक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







