अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेजी का असर वैश्विक क्रिप्टो बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे इसकी कीमत घटकर 64,100 डॉलर के स्तर पर आ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोले जाने के दावों और युद्ध से हुए नुकसान के लिए ईरान से हर्जाने की मांग के बीच वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनमार्केटकैप (CoinMarketCap) के आंकड़ों के अनुसार, बिटकॉइन के साथ-साथ दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी एथेरियम (Ethereum) में भी गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक एथेरियम लगभग 1,890 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। बीते 24 घंटों में बिटकॉइन में करीब 1.5 प्रतिशत और एथेरियम में 2.40 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे कुल वैश्विक क्रिप्टो मार्केट कैप 1.24 प्रतिशत घटकर लगभग 2.19 लाख करोड़ डॉलर रह गया।
मार्केट एनालिसिस और एक्सपर्ट्स की राय
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बिटकॉइन का भाव 65,000 से 65,500 डॉलर के मजबूत रेजिस्टेंस जोन को पार करने में विफल रहा, जिसके चलते इसमें गिरावट आई और यह दोबारा 64,000 डॉलर के स्तर पर फिसल गया। वहीं, एथेरियम के लिए 1,900 डॉलर के स्तर को पार करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
बाजार में लॉन्ग पोजीशंस (Long Positions) के लिक्विडेट होने से भी दबाव बढ़ा है, हालांकि स्पॉट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) के माध्यम से संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की मांग बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि बिटकॉइन के लिए नीचे की तरफ 63,600 से 63,800 डॉलर के स्तर पर मजबूत सपोर्ट मौजूद है।
भारत में CBDT का बड़ा कदम: OECD फ्रेमवर्क के तहत नए गाइडलाइंस जारी
इस बीच, भारत में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने क्रिप्टो एक्सचेंजों और अन्य मध्यस्थों (Intermediaries) के लिए मौजूदा आयकर कानूनों के तहत ट्रांजैक्शंस की पारदर्शी रिपोर्टिंग के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही ‘ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट’ (OECD) के क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) को लागू कर दिया गया है।
यह फ्रेमवर्क OECD के सदस्य देशों के बीच क्रिप्टो-संपत्तियों पर कर से जुड़ी जानकारी के स्वचालित आदान-प्रदान (Automatic Exchange of Information) की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित करता है। CBDT का कहना है कि कर चोरी रोकने और राजस्व आधार की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। नए दिशानिर्देशों में क्रिप्टो-एसेट को ‘वैल्यू के डिजिटल प्रतिनिधित्व’ के रूप में परिभाषित किया गया है, जो ब्लॉकचेन और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी का उपयोग करती है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







