जयपुर। राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रित परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कैंसर के अत्याधुनिक इलाज CAR-T Cell Therapy को राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के अनुमत मेडिकल पैकेज में शामिल करने की घोषणा की है। इस फैसले से अब ब्लड कैंसर और मल्टीपल मायलोमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हजारों लाभार्थियों को प्रदेश के सूचीबद्ध अस्पतालों में आधुनिक और उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके अनुसार, यह निर्णय गंभीर बीमारियों से लड़ रहे मरीजों को बेहतर उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करेगा।
कैंसर उपचार में नई उम्मीद
CAR-T Cell Therapy दुनिया की सबसे उन्नत इम्यूनोथेरेपी और सेल थेरेपी तकनीकों में शामिल है। यह इलाज मरीज की अपनी प्रतिरोधक क्षमता का उपयोग कर कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने का काम करता है। अब तक यह उपचार बेहद महंगा होने के कारण अधिकांश परिवारों की पहुंच से बाहर था, लेकिन RGHS में शामिल होने के बाद पात्र लाभार्थियों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगा।
कैसे काम करती है CAR-T Cell Therapy?
इस थेरेपी में सबसे पहले मरीज के रक्त से T-Cells निकाली जाती हैं। प्रयोगशाला में इन कोशिकाओं को जेनेटिक रूप से संशोधित कर इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सकें। इसके बाद संशोधित CAR-T Cells को दोबारा मरीज के शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है, जहां वे कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट करती हैं। सरल शब्दों में कहें तो यह उपचार मरीज की अपनी रोग प्रतिरोधक प्रणाली को कैंसर के खिलाफ अधिक प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करता है।
किन मरीजों को मिलेगा लाभ?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, CAR-T Cell Therapy मुख्य रूप से कुछ विशेष प्रकार के ब्लड कैंसर और मल्टीपल मायलोमा के मरीजों के लिए प्रभावी मानी जाती है। खासतौर पर उन मरीजों में, जिनकी बीमारी कीमोथेरेपी या रेडिएशन के बाद दोबारा लौट आती है या पारंपरिक उपचार असर नहीं कर रहे होते। जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल सहित प्रदेश के सूचीबद्ध कैंसर अस्पतालों में इस उन्नत चिकित्सा सुविधा का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
प्री-ऑथराइजेशन होगा अनिवार्य
राजस्थान सरकार की नई ऑनकोलॉजी गाइडलाइंस और RGHS नियमों के तहत CAR-T Cell Therapy का लाभ लेने के लिए एम्पैनल्ड अस्पताल में भर्ती से पहले प्री-ऑथराइजेशन जरूरी होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सिफारिश और मरीज की चिकित्सीय पात्रता के आधार पर ही इस उपचार को मंजूरी दी जाएगी।सरकार का कहना है कि यह थेरेपी हर कैंसर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है, इसलिए इसका उपयोग केवल विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर किया जाएगा।
आर्थिक बोझ से मिलेगी राहत
CAR-T Cell Therapy की लागत सामान्यतः लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में RGHS के तहत इसे शामिल किए जाने से हजारों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को महंगे इलाज के लिए दूसरे राज्यों या निजी अस्पतालों का सहारा लेने की आवश्यकता कम होगी। राज्य सरकार का यह फैसला गंभीर बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक संबल भी प्रदान करेगा।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







