अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री और दंडी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने राजस्थान के सीकर प्रवास के दौरान देश के सामाजिक, राजनीतिक और वैश्विक घटनाक्रमों पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान शीर्ष राजनेताओं के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी अनैतिक और अमर्यादित बयानबाजी करने वाले अराजक तत्व देश के ‘जेन-जी’ (युवा पीढ़ी) का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे केवल व्यक्तिगत मानसिक और लैंगिक हताशा के शिकार हैं।
स्वामी जितेंद्रानंद ने देश के युवाओं का बचाव करते हुए कहा कि भारत के वास्तविक ‘जेन-जी’ वे युवा हैं जो अपने आराध्य देव के लिए हरिद्वार से 15 दिनों तक पैदल चलकर 4.80 करोड़ कांवड़ लेकर यात्रा करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय समाज समलैंगिक और अनैतिक आचरण पर आधारित नहीं है, और जंतर-मंतर पर दिखा दृश्य केवल सामाजिक मूल्यों के पतन का प्रतीक था।
राहुल गांधी को अंबेडकरवाद और मनुस्मृति पर खुली बहस की चुनौती
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति और मनुवाद पर लगातार उठाए जा रहे सवालों पर निशाना साधते हुए दंडी स्वामी ने कहा कि 1794 में विलियम जोन्स द्वारा मुद्रित पुस्तक वास्तविक मनुस्मृति का सही स्वरूप नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी को सीधे मंच से खुली चुनौती देते हुए कहा: “अगर राहुल गांधी मनुस्मृति पर सवाल उठाते हैं, तो वे सभी धर्मों के ग्रंथों और उनमें महिलाओं की स्थिति पर खुला तुलनात्मक विमर्श करवाएं। साथ ही, जब भी मनुवाद बनाम अंबेडकरवाद पर बहस हो, तो अंबेडकर-इस्लाम और गांधी-ईसाई धर्म के संबंधों पर भी निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए।”
न्यायपालिका और समलैंगिकता के फैसलों पर तीखा रुख
समलैंगिक संबंधों को अपराध मुक्त करने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के संदर्भों पर बोलते हुए संत समिति के महामंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कानून या संविधान की किताबी धाराओं से पहले समाज और परिवार नैतिक मूल्यों के बंधन से चलते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नैतिकता हमेशा कानून से ऊपर होती है, और न्यायपालिका को देश की सांस्कृतिक और सामाजिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए।
संन्यासियों की राजनीति और ‘योगी मॉडल’
राजनीति में साधु-संतों के प्रवेश पर स्वामी जितेंद्रानंद ने माना कि संन्यासियों को निचले स्तर की दलीय राजनीति से दूर रहना चाहिए। हालांकि, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसका अपवाद बताया। योगी आदित्यनाथ का मॉडल: उन्हें राजनीति गोरक्षनाथ पीठ की परंपरा के तहत विरासत में मिली है और उन्होंने पिछले 10 वर्षों में यूपी में माफिया राज को खत्म कर कानून का शासन स्थापित किया है। अन्य भगवाधारियों पर तंज: उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के बाद संसद पहुंचे कई अन्य भगवाधारियों ने बाद में केवल जातियों के धर्माचार्य बनकर जनता के साथ छल किया।
2027 से 2031 के बीच तीसरे विश्व युद्ध की भविष्यवाणी
वैश्विक हालातों पर चर्चा करते हुए स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने एक बड़ी चेतावनी और भविष्यवाणी भी की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अमेरिका और रूस जैसे शक्तिशाली देश लंबे युद्धों में उलझे हुए हैं, जबकि भारत की आंतरिक और सीमा सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 से 2031 के बीच तीसरा विश्व युद्ध होना तय है। इस महायुद्ध में अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले अमेरिका को सबसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा और उसका विघटन संभव है, जबकि भारत इस दौर के बाद एक वैश्विक महाशक्ति और ‘अखंड भारत’ के रूप में उभरेगा।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







