भाजपा में संगठन स्तर पर बड़े बदलाव के बाद अब संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी टीम में बदलाव कर सकते हैं। इस दौरान कुछ नए चेहरों को सरकार में जिम्मेदारी मिल सकती है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की भूमिका बदली जा सकती है या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद कैबिनेट में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा और तेज हुई है। खासतौर पर उन नेताओं पर नजर है, जिन्हें संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।
कैबिनेट में 12 पद अभी खाली
मौजूदा मोदी सरकार में कुल 69 मंत्री हैं, जबकि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं। ऐसे में सरकार के पास करीब 12 और पद भरने की गुंजाइश है। हालांकि, सभी पदों को एक साथ भरने की संभावना कम मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक करीब 6-7 नए चेहरों को सरकार में जगह मिल सकती है। संभावित फेरबदल में चुनावी जरूरतों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, उम्र, प्रदर्शन और भाजपा के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत को ध्यान में रखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों को मंत्रिमंडल में बेहतर प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
अनुराग ठाकुर की वापसी की चर्चा
संभावित नए चेहरों में भाजपा के युवा नेता अनुराग ठाकुर का नाम भी चर्चा में है। पार्टी आने वाले चुनावों को देखते हुए युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दे सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की ओर से ही किया जाएगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा संगठन में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में उनके सामने ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत लागू होने की स्थिति में कैबिनेट से बाहर होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी तक उनके मंत्रिमंडल से बाहर होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि पार्टी संगठन और सरकार में उनकी भूमिका को किस तरह संतुलित करती है।
पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा पर भी नजर
हर्ष मल्होत्रा दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए हैं और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री हैं। इसी तरह पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष होने के साथ केंद्र में वित्त राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यदि संगठन और सरकार में एक व्यक्ति को एक ही बड़ी जिम्मेदारी देने के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जाता है, तो इन नेताओं की मंत्रिमंडल में भूमिका पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पंकज चौधरी को सरकार में बनाए रखने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
हरदीप पुरी की कैबिनेट से हो सकती है विदाई?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है और उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यदि उन्हें राज्यसभा का नया कार्यकाल नहीं मिलता है, तो पेट्रोलियम मंत्रालय की जिम्मेदारी किसी अन्य नेता को सौंपे जाने की संभावना बन सकती है। हालांकि, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
नितिन गडकरी का विभाग बदलेगा?
संभावित कैबिनेट फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को लेकर है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के मुद्दे पर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर लगातार बहस देखने को मिल रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा नितिन गडकरी के मंत्रालय में बड़ा बदलाव करने से बच सकती है। गडकरी सरकार के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और उनका संगठन के भीतर भी मजबूत प्रभाव माना जाता है। इसलिए उनके विभाग में बदलाव या उन्हें कैबिनेट से बाहर किए जाने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के आकलन पर निर्भर करेगा।
श्रीकांत शिंदे को मिल सकता है मंत्री पद?
महाराष्ट्र से शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम भी संभावित नए मंत्रियों में चर्चा में है। वह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए श्रीकांत शिंदे को केंद्र सरकार में जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें हैं। महाराष्ट्र में गठबंधन के भीतर समय-समय पर सामने आए मतभेदों को देखते हुए कैबिनेट विस्तार को दोनों दलों के रिश्ते मजबूत करने के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है।
चुनावी रणनीति पर होगा पूरा फोकस
संभावित कैबिनेट फेरबदल में आगामी विधानसभा चुनाव सबसे बड़ा फैक्टर हो सकता है। उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में चुनावी तैयारियों के बीच भाजपा क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर नए चेहरों को आगे बढ़ा सकती है। हालांकि, मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में मंत्रियों की विदाई, नए चेहरों की एंट्री या मंत्रालयों में बदलाव को फिलहाल संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







