नागौर: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी चोरी के मामले के बाद अब राजस्थान के प्रसिद्ध बुटाटी धाम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। श्री चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति के पदाधिकारियों पर करीब 22 करोड़ रुपए के गबन और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। न्यायालय के आदेश के बाद कुचेरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में समिति के निर्वतमान अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़ पुत्र चंदन सिंह निवासी बुटाटी को नामजद किया गया है। परिवाद में समिति के अन्य पदाधिकारियों पर भी मंदिर की संपत्ति और दानराशि के हिसाब में कथित अनियमितता करने के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीण जयपाल सिंह राठौड़, सुशील चोयल, सुखराम चोयल और कानाराम भाणवाल की ओर से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया था। इसके आधार पर पुलिस थाना कुचेरा में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मंदिर के प्रबंधन और बैंक खातों से जुड़े आरोप
परिवाद के अनुसार देवेंद्र सिंह राठौड़ करीब तीन वर्षों तक श्री चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उनके पास मंदिर के प्रबंधन, बैंक खातों, दान पेटियों, रसीद पुस्तकों, खरीद, भुगतान और लेखा-अभिलेखों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस अवधि के दौरान मंदिर की आय और संपत्ति के हिसाब में कई गंभीर अनियमितताएं हुईं। मामले में जिला मजिस्ट्रेट नागौर की ओर से समिति गठित कर जांच कराए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
नकदी, सोना-चांदी के हिसाब में अंतर का आरोप
परिवाद में दावा किया गया है कि मंदिर की दानराशि से संबंधित रिकॉर्ड में करीब 40 लाख रुपए का लेखांकन नहीं होने की बात सामने आई। इसके अलावा करीब 2,219 रसीदों का रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के दस्तावेजों तथा मौके पर उपलब्ध सामग्री के बीच अंतर होने का दावा किया गया है। जांच में करीब 35.500 किलोग्राम चांदी की अतिरिक्त खरीद का भी आरोप लगाया गया है। परिवाद में सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 2 करोड़ 60 लाख 75 हजार रुपए बताया गया है।
रसोई के खर्च पर भी सवाल
मंदिर परिसर में भोजनशाला निर्माण और रसोई संचालन के खर्च को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में भोजनशाला निर्माण के नाम पर करीब 49 लाख 49 हजार 693 रुपए खर्च दर्शाया गया, जबकि मौके पर इस खर्च के अनुरूप काम नहीं होने का दावा किया गया है। इसी तरह रसोई संचालन के नाम पर करीब 1 करोड़ 17 लाख 63 हजार 933 रुपए के खर्च को भी संदिग्ध बताया गया है। इसके अलावा ग्राम विकास, सीसीटीवी कैमरों की खरीद और गौशाला समिति को दी गई राशि समेत कई अन्य मदों में भी लाखों रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप
परिवाद में कहा गया है कि प्रशासनिक जांच के दौरान समिति की ओर से सभी आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाए गए। दानराशि, रसीद, भुगतान, खरीद और अन्य लेखा दस्तावेजों में कथित विसंगतियां मिलने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इन सभी कथित अनियमितताओं को मिलाकर करीब 22 करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामला दर्ज होने के बाद कुचेरा थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब समिति के बैंक खातों, दान पेटियों से जुड़े रिकॉर्ड, रसीद पुस्तकों, खरीद-बिक्री के दस्तावेजों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच कर सकती है। फिलहाल ये सभी शिकायत और जांच में लगाए गए आरोप हैं। मामले में पुलिस की जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितनी वित्तीय अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







