अशोक गहलोत के साथ दूरियों पर बोले गजेंद्र सिंह शेखावत: ‘व्यक्तिगत कड़वाहट से हुआ राजस्थान के विकास का नुकसान’

जोधपुर: नगर निकाय चुनावों को लेकर राजस्थान में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण की प्रक्रिया अंतिम और निर्णायक चरण में है। इस बीच, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर नगर निगम चुनाव, शहरी शासन (अर्बन गवर्नेंस), टिकटों के मापदंड और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अपने संबंधों को लेकर बेबाकी से अपनी बात रखी। विशेष बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि इस बार नगर निगम में भाजपा दो-तिहाई बहुमत से अपना बोर्ड बनाएगी।

शहरी निकायों की व्यवस्था और आधारभूत ढांचा

नगर निगम को शहर के विकास का मुख्य आधार बताते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने मौजूदा शहरी शासन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर अर्बन गवर्नेंस की तुलना में हम अभी पीछे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारे स्थानीय निकायों के पास पर्याप्त अधिकार और संसाधन नहीं हैं और वे राज्य सरकारों पर अत्यधिक निर्भर हैं। विकसित देशों की तर्ज पर जब तक स्थानीय निकायों को स्वतंत्र अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक अपेक्षित बदलाव कठिन है।”

 प्रत्याशी चयन के मापदंड: शिक्षा, अनुभव और युवाओं की भागीदारी

  • हारने वाले प्रत्याशियों का भविष्य: उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में एक बार चुनाव हारने पर किसी का करियर समाप्त नहीं होता। परिस्थितियों और नए सीमांकन के आधार पर योग्य दावेदारों को अवसर दिया जाएगा।

  • शिक्षा की भूमिका: पार्षदों की शैक्षणिक योग्यता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि डिग्री होना अच्छी बात है, लेकिन केवल डिग्री से व्यावहारिक समझ (विजडम) का आकलन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “कई बार उच्च शिक्षित लोग भी व्यावहारिक कार्यों में असहज दिखते हैं, इसलिए शिक्षा के साथ-साथ जमीनी समझ और सक्रियता भी जरूरी है।”

  • युवाओं को अवसर: टिकटों में युवाओं के लिए कोई तय कोटा या अनुपात न होने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का प्रयास रहेगा कि युवाओं को मौका मिले, क्योंकि स्थानीय निकाय ही राजनीति की पहली सीढ़ी होते हैं।

 अशोक गहलोत से रिश्तों में दूरी पर बड़ा बयान

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जुड़े सवाल पर शेखावत ने कहा, “2014 के लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह का व्यक्तिगत बदले (रीवेंज) का रवैया अपनाया गया, उससे राजस्थान के विकास के हितों को नुकसान पहुंचा। अगर उस समय राजस्थान के विकास को प्राथमिकता दी जाती, तो राज्य को केंद्र से काफी कुछ मिल सकता था। इसके बावजूद मैंने व्यक्तिगत संबंधों की मर्यादा हमेशा निभाई है। गहलोत जी राजस्थान के बड़े नेता और मारवाड़ के लिए एसेट हैं।”

 संघ का मार्गदर्शन और भाजपा की निर्णय प्रक्रिया

टिकट वितरण में व्यक्तिगत प्रभाव और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा में कोई एक व्यक्ति टिकट तय नहीं करता, बल्कि एक तय संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत फैसले होते हैं। संघ की भूमिका पर उन्होंने कहा, “आरएसएस हमारा पैतृक संगठन और मार्गदर्शक है। चुनावों सहित विभिन्न मुद्दों पर समय-समय पर उनका मार्गदर्शन लेना स्वाभाविक और सही है।”

Source Rajathan patrika

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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