अजीतगढ़ (सीकर)। जयपुर के हरमाड़ा थाना क्षेत्र में सोमवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे ने अजीतगढ़ थाना क्षेत्र के सीपुर गांव के एक परिवार को तबाह कर दिया। इस दर्दनाक घटना में परिवार के तीन सदस्यों – दो सगे भाई महेंद्र बुनकर (35) और दशरथ बुनकर (32) एवं दशरथ की छोटी बेटी भानु (10) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, दशरथ की बड़ी बेटी वर्षा (12) गंभीर रूप से घायल है, जो जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में जीवन और मृत्यु के बीच जंग लड़ रही है।
तीन अर्थियों के साथ गांव में दस्तक दिया मौत ने
मंगलवार की सुबह जब दो एंबुलेंस गांव सीपुर पहुंचीं और उनमें से तीनों के शव निकले, तो पूरा गांव सन्नाटे में डूब गया। घर के बाहर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और रोने-बिलखने की आवाज़ों से माहौल गमगीन हो उठा। बुजुर्ग माता-पिता भागीरथ और गीतादेवी, दोनों बहुएं माया और सुमन तथा नन्हें-नन्हें बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। पिता भागीरथ बार-बार यही कहते नजर आए – ‘हमारे बुढ़ापे का सहारा चला गया… हे भगवान, अब हमें भी उठा लो।’
एक साथ जीवन, एक साथ अंतिम यात्रा
परिजनों ने बताया कि महेंद्र और दशरथ दोनों भाइयों का विवाह एक साथ हुआ था। दोनों ने जयपुर के बेनाड रोड पर एक साथ मकान बनाया था और मजदूरी करके ही पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। दशरथ की दोनों बेटियां दीपावली की छुट्टियां मनाने अपने चाचा और चाची के पास जयपुर गई हुई थीं। सोमवार को जब वे गांव लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक तेज रफ्तार बेकाबू डंपर ने उनके वाहन को कुचल दिया। मंगलवार को त्रिवेणी श्मशान घाट पर दोनों भाइयों का एक ही चिता पर और छोटी बेटी भानु का दूसरी चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। इस त्रासदी ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को जख्मी कर दिया है।
गरीबी और दुख के गहरे साये में डूबा परिवार
इस हादसे ने परिवार को न सिर्फ emotional बल्कि आर्थिक रूप से भी तोड़ दिया है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बेहद डांवाडोल थी। बुजुर्ग पिता भागीरथ अब काम करने लायक नहीं रहे और खेती-बाड़ी के नाम पर भी कुछ खास नहीं बचा है। महेंद्र और दशरथ ही घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, जो मजदूरी करके परिवार चला रहे थे। उनके जाने के बाद अब परिवार के सामने भविष्य में गुजर-बसर की बड़ी चुनौती है।
ग्रामीणों ने पंचायत समिति प्रधान शंकर लाल यादव से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल सरकारी सहायता राशि मुहैया कराई जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि इस संकट की घड़ी में उन्हें कुछ सहारा मिल सके।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







